करनाल-:करनाल में आयोजित राष्ट्रीय बागवानी सम्मेलन ने देशभर के कृषि वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और प्रगतिशील किसानों को एक मंच पर लाकर कृषि क्षेत्र में नई उम्मीद जगा दी। केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान में शुरू हुए चार दिवसीय सम्मेलन में आधुनिक खेती, गुणवत्तापूर्ण बीज और रोगमुक्त पौध सामग्री को भविष्य की कृषि की सबसे बड़ी जरूरत बताया गया।
“उद्यानिकी फसलों हेतु गुणवत्तापूर्ण बीज एवं रोपण सामग्री का रणनीतिक प्रतिमान” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन का शुभारंभ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब कृषि और बागवानी क्षेत्र तकनीक और गुणवत्ता के साथ आगे बढ़ेंगे।
किसानों के हित में मुख्यमंत्री की बड़ी घोषणाएं
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किसानों के लिए कई अहम घोषणाएं करते हुए कहा कि हरियाणा में 14 नए हॉर्टिकल्चर साइंस सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सलाह और गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।उन्होंने बागवानी फसलों में नुकसान पर मिलने वाले मुआवजे में भी बढ़ोतरी की घोषणा की। अब फलों की फसलों के नुकसान पर किसानों को 50 हजार रुपये प्रति एकड़ तथा सब्जियों और मसालों की फसलों पर 40 हजार रुपये प्रति एकड़ तक सहायता दी जाएगी।इसके अलावा पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट, पौध संरक्षण और रोग नियंत्रण जैसे विषयों में मास्टर और पीएचडी कोर्स शुरू करने की भी घोषणा की गई।
आधुनिक तकनीक बनेगी किसानों की ताकत
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा हरित क्रांति का नेतृत्व कर चुका है और अब बागवानी आधारित खेती किसानों की आय बढ़ाने का नया माध्यम बनेगी। उन्होंने बताया कि गुणवत्तापूर्ण बीज और रोगमुक्त पौध सामग्री से कृषि उत्पादन में 15 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है, जबकि बागवानी फसलों में यह बढ़ोतरी 40 प्रतिशत तक हो सकती है।उन्होंने कहा कि राज्य के किसान ड्रिप इरीगेशन, पॉलीहाउस, नेट हाउस, हाई डेंसिटी प्लांटेशन और टिश्यू कल्चर जैसी आधुनिक तकनीकों को तेजी से अपना रहे हैं।
वैज्ञानिकों ने बताई गुणवत्ता वाले बीज की अहमियत
सम्मेलन में कृषि वैज्ञानिक प्रेम नारायण माथुर ने कहा कि किसानों को प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण बीज का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि स्थानीय बाजारों से खरीदे गए निम्न गुणवत्ता वाले मिश्रित बीज उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं।उन्होंने सरकार द्वारा गुणवत्ता आधारित प्लांटिंग मटेरियल सेंटर स्थापित करने की पहल को किसानों के लिए बेहद लाभकारी बताया।
विश्वविद्यालय बना किसानों का भरोसा
महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सुरेश मल्होत्रा ने कहा कि सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, नई बीमारियों, हाइब्रिड बीज विकास और पौध संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की जा रही है।उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय पिछले चार वर्षों में किसानों को 25 लाख से अधिक गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री उपलब्ध करा चुका है। साथ ही हरियाणा मशरूम उत्पादन में भी तेजी से अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है।
देशभर के विशेषज्ञ कर रहे मंथन
28 से 31 मई तक चलने वाले इस राष्ट्रीय सम्मेलन में 150 से अधिक वैज्ञानिक, शिक्षाविद, नीति निर्माता, उद्योग प्रतिनिधि और प्रगतिशील किसान भाग ले रहे हैं। सम्मेलन के दौरान तकनीकी सत्र, पैनल चर्चा, पोस्टर प्रस्तुति और विशेष व्याख्यान आयोजित किए जा रहे हैं।इन सत्रों में बीज उत्पादन तकनीक, रोगमुक्त रोपण सामग्री, नर्सरी प्रबंधन और सतत उद्यानिकी विकास जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हो रही है।
प्रगतिशील किसानों का सम्मान
सम्मेलन के दौरान हरियाणा के कई प्रगतिशील किसानों को “उद्यान रत्न पुरस्कार-2026” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन किसानों को दिया गया जिन्होंने आधुनिक तकनीक और नवाचार के जरिए बागवानी क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
