शिमला, संजू -:हिमाचल प्रदेश में जनगणना-2027 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं।प्रदेश में जनगणना का पहला चरण 16 जून से 15 जुलाई 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इस बार जनगणना प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल तकनीक पर आधारित होगी, जिसमें मोबाइल एप, ऑनलाइन डेटा एंट्री और स्व-गणना जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल की गई हैं।जनगणना के सफल संचालन के लिए हजारों गणनाकर्ताओं और पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।प्रदेश सरकार इस पूरी प्रक्रिया पर करीब 86 करोड़ रुपये खर्च करेगी। शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान जनगणना कार्य निदेशालय हिमाचल प्रदेश की निदेशक दीप शिखा शर्मा ने यह जानकारी दी।
दीप शिखा शर्मा ने बताया कि जनगणना-2027 देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक और सांख्यिकीय प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से जनसंख्या,परिवारों की स्थिति, आवासीय ढांचे, आर्थिक गतिविधियों और सामाजिक संरचना से जुड़ी अहम जानकारियां एकत्रित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि जनगणना का पहला चरण मकान सूचीकरण एवं आवास गणना का होगा, जो प्रदेशभर में 16 जून से 15 जुलाई 2026 तक संचालित किया जाएगा।उन्होंने बताया कि इस बार जनगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है। नागरिकों को पहली बार स्व-गणना यानी सेल्फ एन्यूमरेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके तहत 1 जून से 15 जून 2026 तक ऑनलाइन पोर्टल खोला जाएगा, जहां परिवार स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद नियुक्त गणनाकर्ता घर-घर जाकर इन सूचनाओं का सत्यापन करेंगे।
दीप शिखा शर्मा ने कहा कि प्रदेश में पहले चरण को सफल बनाने के लिए करीब 20,630 गणनाकर्ताओं और पर्यवेक्षकों की तैनाती की जाएगी।इनके प्रशिक्षण की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।राज्यभर में मास्टर ट्रेनर और फील्ड ट्रेनर तैयार किए गए हैं,जबकि गणनाकर्ताओं और सुपरवाइजरों का प्रशिक्षण 1 जून से 12 जून तक आयोजित किया जाएगा।उन्होंने बताया कि जनगणना के लिए विशेष रूप से विकसित HLO यानी हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन मोबाइल एप का इस्तेमाल किया जाएगा। इस एप के जरिए आंकड़े रियल टाइम में अपलोड किए जाएंगे, जिससे निगरानी बेहतर होगी और त्रुटियों की संभावना कम होगी। डिजिटल माध्यम अपनाने से पूरी प्रक्रिया तेज, सटीक और समयबद्ध तरीके से पूरी की जा सकेगी।दीप शिखा शर्मा ने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि जनगणना में सही और पूरी जानकारी देना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान एकत्रित की गई सभी जानकारियां जनगणना अधिनियम-1948 के तहत पूरी तरह गोपनीय रखी जाएंगी और उनका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।उन्होंने कहा कि जनगणना-2027 से प्राप्त आंकड़े भविष्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल, आवास और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और संसाधनों के उचित आवंटन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
