शिमला,4 फरवरी-:पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने पंचायत चुनावों को लेकर प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू बार-बार प्रदेशवासियों को गुमराह कर रहे हैं। यदि सरकार की मंशा शुरू से ही समय पर पंचायत चुनाव न करवाने की थी और उच्च न्यायालय के आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देनी ही थी, तो चुनावी तैयारियों का दिखावा क्यों किया गया।
जयराम ठाकुर ने कहा कि जब भाजपा सरकार द्वारा चुनावों में हो रही देरी पर सवाल उठा रही थी, तब मुख्यमंत्री और उनके मंत्री बार-बार दावा कर रहे थे कि पंचायत चुनाव समय पर होंगे। अब यह साफ हो गया है कि सरकार ने अपनी गिरती लोकप्रियता के डर से पहले ही चुनाव टालने का फैसला कर लिया था। इसी वजह से राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों की लगातार अनदेखी की गई और निर्वाचन सूची के प्रकाशन में जानबूझकर देरी की गई।नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की दुहाई देने वाली कांग्रेस सरकार आज स्वयं लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है और महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने को कुचलने का काम कर रही है। पंचायत और शहरी निकायों के चुनाव न करवाकर सरकार ग्रामीण और शहरी विकास को ठप कर रही है।उन्होंने कहा कि बिना निर्वाचित स्थानीय निकायों के केंद्र सरकार की सैकड़ों योजनाओं का क्रियान्वयन संभव नहीं है। 16वें वित्त आयोग के तहत ग्रामीण और शहरी निकायों के लिए प्रस्तावित लगभग 8 लाख करोड़ रुपये की राशि का लाभ भी प्रदेश को नहीं मिल पाएगा। चुनावों में देरी से केंद्र से मिलने वाली धनराशि या तो रुकेगी या बहुत देर से मिलेगी, जिसकी भरपाई प्रदेश कैसे करेगा।
जयराम ठाकुर ने मनरेगा की बदहाली का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार की नाकामी के कारण प्रदेश में 1.72 लाख मनरेगा परियोजनाएं अटकी पड़ी हैं और 655 पंचायतों में एक भी व्यक्ति को एक दिन का रोजगार तक नहीं मिला है।उन्होंने याद दिलाया कि 9 जनवरी को माननीय उच्च न्यायालय ने 30 अप्रैल तक पंचायत चुनाव संपन्न करवाने के स्पष्ट आदेश दिए थे, लेकिन सरकार तब से चुनाव करवाने के बजाय चुनाव रोकने की रणनीति पर काम कर रही थी। चुनावी खर्च का रोना रोने वाली सरकार, चुनाव न करवाने के लिए मुकदमे लड़ने में करोड़ों रुपये खर्च कर रही है।नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार आपदा प्रबंधन कानून का बहाना बनाकर पंचायत चुनाव रोकना चाहती है, जबकि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं और आपदा राहत के नाम पर मिले केंद्र के धन का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि आपदा प्रबंधन कानून लागू होने के बाद उन्होंने आपदा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने के लिए कितने दौरे किए हैं।
