Karnal,5 December-:देश में खाद्यान्न सुरक्षा को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए गेहूं उत्पादन का लक्ष्य 119 मिलियन टन निर्धारित किया है। यह अब तक का सबसे बड़ा लक्ष्य है,जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 3.47 प्रतिशत अधिक है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार 2024-25 में जहां 115 मिलियन टन के लक्ष्य के मुकाबले लगभग 117.5 मिलियन टन उत्पादन का अनुमान है,वहीं लगातार अनुकूल मौसम और वैज्ञानिक खेती के कारण आगामी वर्ष में फसल और बेहतर रहने की उम्मीद है।
करनाल स्थित राष्ट्रीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान केंद्र (IIWBR) के निदेशक डॉ.रतन तिवारी ने बताया कि इस सीजन में मौसम पूरी तरह गेहूं की वृद्धि के अनुकूल है।अधिकांश क्षेत्रों में समय पर बिजाई हो चुकी है और फसल में फुटाव बेहतरीन देखने को मिल रहा है। तापमान भी इस समय गेहूं के अनुकूल दायरे में है,जिसके कारण किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद है।संस्थान ने गेहूं की फसल में रोगों से बचाव के लिए विशेष एडवाइजरी भी जारी की है। जिन खेतों में बिजाई को 21–25 दिन हो चुके हैं, वहां पहली सिंचाई के साथ निर्धारित मात्रा में यूरिया देने की सलाह दी गई है। डॉ. तिवारी ने पीले रतवे (येलो रस्ट) के संभावित खतरे को देखते हुए किसानों को नियमित निगरानी रखने और लक्षण दिखते ही कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क करने की अपील की है।
पछेती बिजाई करने वाले किसानों के लिए पीबीडब्ल्यू-771 और GKW-261 को सबसे उपयुक्त किस्में बताया गया है, जो अधिक उत्पादन के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता भी रखती हैं। डॉ. तिवारी ने यह भी जानकारी दी कि संस्थान द्वारा विकसित नई रोग-रोधी प्रजातियां अनुमोदन के बाद जल्द किसानों के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी। इन किस्मों में पीला रतवा प्रतिरोध मजबूत है, जिससे उत्पादन बढ़ाने में बड़ी सहायता मिलेगी।
