Delhi,5 December-:हमीरपुर के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने लोकसभा के शून्यकाल के दौरान हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से जुड़े पौंग डैम / महाराणा प्रताप सागर के विस्थापितों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि पुनर्वास की प्रक्रिया को तेज़ करने के लिए जलशक्ति मंत्रालय, गृह मंत्रालय तथा राजस्थान और हिमाचल प्रदेश सरकारों की संयुक्त भागीदारी वाली एक इंटर-मिनिस्टीरियल समिति तुरंत गठित की जाए। उनके वक्तव्य का समर्थन कांगड़ा के सांसद राजीव भारद्वाज ने भी किया।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि पौंग डैम का निर्माण हुए 50 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है,लेकिन विस्थापित परिवार अब भी न्याय की प्रतीक्षा में हैं।ब्यास नदी पर बने इस डैम के कारण 339 गांवों के लगभग 20,772 परिवारों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा था। 1970 के समझौते और राजस्थान कॉलोनाइजेशन रूल्स 1972 के अनुसार इन परिवारों को राजस्थान की सिंचित भूमि में पुनर्वास देने का वादा किया गया था,परंतु यह वादा अब तक पूर्ण रूप से पूरा नहीं हो पाया है।उन्होंने बताया कि 6,700 से अधिक परिवार अब भी जमीन आवंटन की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि जिन परिवारों को जमीन मिल गई है वे भी बुनियादी सुविधाओं—सड़क, पानी, बिजली, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं—की कमी से परेशान हैं। कई क्षेत्रों में कब्ज़े और प्रशासनिक बाधाएँ पुनर्वास प्रक्रिया को और धीमा कर रही हैं।
अनुराग ठाकुर ने कहा,“यह केवल प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि विस्थापितों के सम्मान और जीवन से जुड़ी नैतिक ज़िम्मेदारी है।पचास साल का इंतज़ार बहुत लंबा समय है। इन परिवारों को वह सुरक्षा,भूमि और सम्मान मिलना चाहिए जिसका उनसे वादा किया गया था।”उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि पेंडिंग मामलों की निगरानी के लिए सेंट्रल हाई-पावर कमेटी को फिर से मजबूत किया जाए और पुनर्वास क्षेत्रों में आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए बजट आवंटन सरल बनाया जाए। साथ ही, विस्थापितों के लिए डोमिसाइल सर्टिफिकेट और किसान क्रेडिट कार्ड प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान करने की भी मांग की।अनुराग ठाकुर ने कहा कि केंद्र व दोनों राज्य सरकारों के साझा प्रयासों से ही पौंग विस्थापितों को उनका अधिकार और सम्मान मिल सकेगा।
