करनाल-:रोहतक से कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने शनिवार को असंध में आयोजित कार्यक्रम के दौरान केंद्र और हरियाणा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।उन्होंने नीट परीक्षा विवाद,किसानों की समस्याओं,बढ़ती महंगाई,अवैध कॉलोनियों और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा।नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर बोलते हुए हुड्डा ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्षों में कई परीक्षाएं विवादों में रही हैं,जिससे युवाओं का भरोसा प्रभावित हुआ है।इस मामले में उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की।
सीबीएसई चेयरमैन की कृषि मंत्रालय में सचिव पद पर नियुक्ति को लेकर भी हुड्डा ने प्रतिक्रिया दी।उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं और कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।कुरुक्षेत्र में हुए विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों को अपनी बात रखने के लिए कई बार प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है।उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी पक्षों को अपनी बात रखने का समान अवसर मिलना चाहिए।महंगाई के मुद्दे पर हुड्डा ने कहा कि पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों का असर आम लोगों के बजट पर पड़ रहा है।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महंगाई पर नियंत्रण पाने में विफल रही है।अवैध कॉलोनियों के विषय पर भी उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों की निष्पक्षता को लेकर जनता के बीच विश्वास बना रहना आवश्यक है।प्रदर्शनों की अनुमति के मुद्दे पर हुड्डा ने आरोप लगाया कि विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों के साथ अलग-अलग व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।इनेलो विधायक और एक अधिकारी के बीच हुए विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि कानून और प्रशासनिक मामलों में निष्पक्षता दिखाई देनी चाहिए।उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों और प्रशासन दोनों की गरिमा बनाए रखना आवश्यक है।
