Shimla,16 July-ऊपरी शिमला के क्षेत्रों में वन विभाग की भूमि पर लगे सेब के पेड़ों की कटाई को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कोर्ट के आदेशों के तहत चल रही इस कार्रवाई से स्थानीय बागवानों के साथ-साथ जुब्बल-कोटखाई से विधायक और हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर भी नाराज हैं।उन्होंने पेड़ों की कटाई की टाइमिंग और मानवीय पहलुओं पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि वे इस मुद्दे को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के समक्ष उठाएंगे।
रोहित ठाकुर ने कहा कि यह कार्रवाई कोर्ट के निर्देशों के चलते हो रही है,लेकिन यह सही समय नहीं था। उन्होंने याद दिलाया कि 2015 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने पांच बीघा तक की भूमि पर कोई कार्रवाई न करने की नीति बनाई थी, जिसे 2017 में सत्ता बदलने के बाद लागू नहीं किया गया।
रोहित ठाकुर ने कहा कि मानसून के समय पौधारोपण किया जाता है, ऐसे में सेब के पेड़ों की कटाई न सिर्फ बागवानों को आर्थिक नुकसान पहुंचा रही है,बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी सही नहीं है।ठाकुर ने कहा कि सेब की फसल इस समय मंडियों में जाने के लिए तैयार है और ऐसे समय पर कटाई से छोटे किसानों की आजीविका प्रभावित हो रही है। उन्होंने मांग की कि पांच बीघा से कम भूमि वाले किसानों को राहत दी जाए।
आपदा के बाद शिक्षा विभाग ने उठाया बड़ा कदम
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने जानकारी दी कि राज्य में आई आपदाओं के बाद शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। अब किसी भी नदी या नाले के किनारे स्कूल भवन नहीं बनाए जाएंगे।उन्होंने कहा कि हालिया बादल फटने और बाढ़ की घटनाओं से हुए नुकसान को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।अब न सिर्फ शिक्षा विभाग, बल्कि अन्य विभागों को भी नदी-नालों के किनारे निर्माण कार्य से बचना चाहिए।
केंद्र सरकार पर साधा निशाना
2023 की आपदा में हिमाचल को समय पर सहायता न मिलने को लेकर रोहित ठाकुर ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य को तत्काल सहायता की जरूरत थी लेकिन केंद्र से मदद 2025 में मिल रही है,जब नुकसान पहले ही हो चुका है।उन्होंने बताया कि आपदा में कई सरकारी स्कूल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं और करीब 10 स्कूलों को फिर से शुरू करने के लिए निजी भवन किराए पर लिए जाएंगे। मंत्री ने कहा कि वह जल्द ही सिराज क्षेत्र का दौरा करेंगे और वहां की स्थिति का जायज़ा लेंगे.
