Mohit Prem Sharma (Editor)
हिमाचल प्रदेश की सियासत में एक ऐसा नाम जिसने संघर्ष, मेहनत, ईमानदारी और निष्ठा के बल पर मुख्यमंत्री पद तक का सफर तय किया—वह हैं सुखविंदर सिंह सुक्खू। एक साधारण परिवार से निकलकर छात्र राजनीति में कदम रखने वाले सुक्खू का सफर आसान नहीं रहा, लेकिन उनकी जुझारू प्रवृत्ति और जनता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें राजनीति के शिखर तक पहुंचा दिया।
शुरुआती जीवन और शिक्षा
सुखविंदर सिंह सुक्खू का जन्म 27 मार्च 1964 को हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के नादौन उपमंडल में हुआ। वे एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं।उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्कूल से प्राप्त की और फिर शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से स्नातक और फिर कानून (LLB) की पढ़ाई पूरी की।
छात्र राजनीति से शुरुआत
उनका राजनीतिक सफर अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की छात्र इकाई NSUI (National Students’ Union of India) से शुरू हुआ। वे कॉलेज और विश्वविद्यालय में छात्रों की समस्याओं के लिए मुखर रहे और जल्दी ही NSUI के प्रदेश अध्यक्ष बने। युवाओं से जुड़ाव और जमीन से जुड़े मुद्दों पर काम करने की वजह से वे लोकप्रिय होते गए।
छात्र राजनीति के बाद सुक्खू ने युवा कांग्रेस में काम किया और 8 वर्षों तक हिमाचल प्रदेश युवक कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। यह कार्यकाल उनके लिए राजनीतिक परिपक्वता का दौर रहा। वर्ष 2003 में उन्हें कांग्रेस पार्टी ने नादौन विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया और उन्होंने जीत दर्ज कर पहली बार विधायक बने। इसके बाद वे 2007 और 2017 में भी नादौन से जीत हासिल करते रहे।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और संगठनात्मक मजबूती
2013 से 2019 तक सुखविंदर सिंह सुक्खू हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। इस दौरान उन्होंने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत किया और कार्यकर्ताओं के बीच अपनी पकड़ बनाई। उन्हें एक अनुशासित, ईमानदार और संगठन-निष्ठ नेता के रूप में जाना जाता है।
मुख्यमंत्री बनने का संघर्षपूर्ण मोड़
2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बहुमत मिला, लेकिन मुख्यमंत्री पद के लिए कई नाम सामने आए। सुखविंदर सिंह सुक्खू का नाम सबसे प्रमुख नहीं था, लेकिन उनकी ईमानदारी, संगठन के प्रति समर्पण और लंबे संघर्ष को देखते हुए हाईकमान ने उन्हें 11 दिसंबर 2022 को हिमाचल प्रदेश का 15वां मुख्यमंत्री नियुक्त किया।
नेतृत्व शैली और नीतियाँ
मुख्यमंत्री बनने के बाद सुक्खू ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती, पारदर्शिता और युवाओं को अवसर देने पर जोर दिया। उन्होंने सरकारी सिस्टम में जवाबदेही लाने के लिए डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा दिया और क्लाइमेट फ्रेंडली पॉलिसी पर भी कार्य किया।
सुखविंदर सिंह सुक्खू का राजनीतिक सफर इस बात का प्रमाण है कि सिद्धांतों और समर्पण के साथ राजनीति की जा सकती है। एक छात्र नेता से प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने तक का उनका सफर उन लाखों युवाओं को प्रेरणा देता है जो राजनीति को बदलाव का माध्यम मानते हैं।
