शिमला, 4 फरवरी -:केंद्रीय बजट में राजस्व घाटा अनुदान (RDG) के बंद होने का मुद्दा हिमाचल प्रदेश में तेजी से गरमाता जा रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि RDG का अचानक बंद होना प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर डालेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमाचल को 2019 से 2025 तक इस अनुदान के रूप में 48 हजार करोड़ रुपये मिले थे और यह 1952 से लगातार मिल रहा था। मुख्यमंत्री ने कहा कि RDG के बंद होने की कल्पना भी पहले कभी नहीं की गई थी।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि इस मुद्दे पर 8 फरवरी को कैबिनेट बैठक बुलाई गई है। उसी दिन विधायक दल की बैठक भी विचाराधीन है, जिसमें भाजपा के विधायकों को भी शामिल किया जा सकता है। इस बैठक में RDG के बंद होने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को स्पष्ट करने के लिए प्रेजेंटेशन भी दी जाएगी। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि पार्टी लाइन से ऊपर उठकर RDG को बचाने के लिए केंद्र सरकार से एकजुट होकर बात करें।साथ ही मुख्यमंत्री ने एक अहम फैसला करते हुए कहा कि हिमाचल की भूमि पर लगे विद्युत परियोजनाओं से अब सरकार कर वसूलेगी। इसका उद्देश्य राज्य के वित्तीय संसाधनों को मजबूत करना और RDG बंद होने से उत्पन्न अंतर को कम करना है।
मुख्यमंत्री ने GST पर भी केंद्र सरकार को निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस कर प्रणाली का लाभ बड़े राज्यों को हुआ है, जबकि पहाड़ी और छोटे राज्यों जैसे हिमाचल को इसका नुकसान उठाना पड़ा। सांसद अनुराग ठाकुर को चुनौती देते हुए उन्होंने पूछा कि वे स्पष्ट करें कि RDG बंद होने के पक्ष में हैं या विरोध में।सुक्खू ने कहा कि हिमाचल का विकास पर्यावरण-संवेदनशील तरीके से होता है। प्रदेश की 68 प्रतिशत भूमि वन क्षेत्र है, 28 प्रतिशत फॉरेस्ट कवर है और पाँच प्रमुख नदियाँ हैं। ऐसे राज्य के लिए RDG जीवनरेखा की तरह है। उन्होंने कहा कि RDG के बंद होने का असर सीधे प्रदेश की जनता और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए जनता को संघर्ष के लिए तैयार रहना होगा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह वक्त राजनीति से ऊपर उठकर हिमाचल के हित में मिलकर कार्रवाई करने का है। 8 फरवरी की बैठक में विधायक दल को स्थिति की गंभीरता समझाई जाएगी और RDG को बचाने के उपायों पर चर्चा होगी।इस निर्णय और बैठक के माध्यम से सरकार यह संदेश देना चाहती है कि हिमाचल अपने आर्थिक अधिकारों और विकास के संसाधनों के लिए पूरी तरह गंभीर है। RDG की रक्षा और राज्य की वित्तीय सुरक्षा के लिए सभी दलों और जनता की सक्रिय भागीदारी आवश्यक होगी।
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