मोदी सरकार की नई पहल से हिमाचल को बड़ा फायदा, 90:10 फंडिंग से ग्रामीण विकास को मिलेगी गति: बिंदल

Shimla, 7 January -:शिमला में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों और नई ग्रामीण रोजगार योजना वीबी–जी राम जी (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन–ग्रामीण) को ग्रामीण भारत और विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश के लिए परिवर्तनकारी बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने रोजगार को केवल सहायता योजना के रूप में नहीं, बल्कि विकास से जोड़कर एक स्थायी और परिणामोन्मुखी मॉडल प्रस्तुत किया है।
डॉ. बिंदल ने बताया कि संसद के शीतकालीन सत्र में पारित वीबी–जी राम जी अधिनियम, 2025 ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह योजना केवल मजदूरी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में बुनियादी ढांचे, जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और आजीविका के स्थायी साधनों के निर्माण से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रामीण भारत के लिए एक नए युग की शुरुआत है, जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई है।उन्होंने ग्रामीण रोजगार योजनाओं के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि आजादी के बाद 1960–61 में रूरल मैनपावर प्रोग्राम से लेकर वर्ष 2005 में मनरेगा तक कई योजनाएं लागू की गईं। मनरेगा ने ग्रामीण रोजगार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन समय के साथ उसकी सीमाएं भी सामने आईं। डॉ. बिंदल के अनुसार, मनरेगा में 100 दिन की रोजगार गारंटी थी, परंतु औसतन केवल 50.4 दिन का ही रोजगार सृजन हो सका। बदलती सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए एक नई, अधिक प्रभावी और विकास आधारित योजना की आवश्यकता थी, जिसके परिणामस्वरूप वीबी–जी राम जी अधिनियम अस्तित्व में आया।
डॉ. बिंदल ने कहा कि वीबी–जी राम जी योजना में 125 दिन की कानूनी रोजगार गारंटी दी गई है, जो सीधे विकास परियोजनाओं से जुड़ी होगी। इसके तहत ग्राम सभा स्तर पर गांव का विकास प्लान तैयार किया जाएगा। यह प्लान ब्लॉक और जिला स्तर से अनुमोदित होकर पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इसी विकास योजना के क्रियान्वयन के दौरान रोजगार सृजित होगा, जिससे न केवल मजदूरी मिलेगी, बल्कि गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण भी होगा।उन्होंने बताया कि यह योजना पूरी तरह तकनीक आधारित है। बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटल मल्टी-लेवल मॉनिटरिंग, छह माह में समीक्षा, और समयबद्ध भुगतान जैसी व्यवस्थाएं इसमें शामिल हैं। यदि समय पर रोजगार या भुगतान नहीं होता है, तो लाभार्थी को मुआवजा देने का भी प्रावधान किया गया है, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
फंडिंग पैटर्न पर कांग्रेस के आरोपों का जवाब
फंडिंग पैटर्न पर कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए डॉ. बिंदल ने कहा कि हिमाचल जैसे हिमालयी राज्यों के लिए केंद्र और राज्य का अनुपात 90:10 रखा गया है, जो प्रदेश के लिए बेहद लाभकारी है। अन्य मैदानी राज्यों के लिए यह अनुपात 60:40 है। केंद्र सरकार ने राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियों, कठिन भू-भाग और सीमित संसाधनों को ध्यान में रखते हुए यह विशेष व्यवस्था की है, लेकिन कांग्रेस इस पर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है।
रोजगार और खर्च के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए डॉ. बिंदल ने कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल (2006 से 2014) में मनरेगा पर 2.13 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि मोदी सरकार ने 2014 से 2025 के बीच 8.53 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए। इसी तरह रोजगार सृजन के मामले में यूपीए सरकार के दौरान 1660 मिलियन मंडेज सृजित हुए, जबकि एनडीए सरकार के दौरान यह आंकड़ा बढ़कर 3210 मिलियन मंडेज तक पहुंच गया। पूर्ण किए गए कार्यों की संख्या भी यूपीए काल में 153 लाख थी, जो एनडीए सरकार में बढ़कर 862 लाख हो गई।
हिमाचल प्रदेश का विशेष उल्लेख करते हुए डॉ. बिंदल ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान प्रदेश में केवल 16.52 लाख मंडेज सृजित हुए थे, जबकि मोदी सरकार के कार्यकाल में यह आंकड़ा बढ़कर 32.6 लाख मंडेज तक पहुंच गया है, यानी रोजगार सृजन दोगुना हुआ है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि भाजपा सरकार ग्रामीण रोजगार को लेकर कितनी गंभीर और प्रतिबद्ध है।
डॉ. बिंदल ने बताया कि वीबी–जी राम जी योजना के तहत लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पहले की योजनाओं की तुलना में कहीं अधिक है। यह योजना चार प्रमुख क्षेत्रों—ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका—पर केंद्रित है। योजना के बेहतर क्रियान्वयन, निगरानी और ऑडिट के लिए प्रशासनिक व्यय को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत किया गया है।उन्होंने कहा कि कांग्रेस केवल नाम बदलने का मुद्दा उठाकर जनता को गुमराह कर रही है, जबकि असली मुद्दा परिणाम और विकास है। यदि प्रदेश सरकार समय पर अपना 10 प्रतिशत अंशदान नहीं देती है, तो यह उसकी ग्रामीण और गरीब विरोधी सोच को उजागर करेगा। भाजपा इस योजना को गांव-गांव तक पहुंचाने और ग्रामीण भारत के सशक्तिकरण के लिए पूरी मजबूती से खड़ी रहेगी।

Ekta TSN

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