Faridabad, 13 January-:फरीदाबाद के एनआईटी-5 इलाके में स्थित गुरुद्वारा शहीदाने गुजरात ट्रेन न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारत-पाक विभाजन के दौरान हुए भयानक नरसंहार की याद दिलाने वाला ऐतिहासिक स्थल भी है। यहां हर साल 12 जनवरी को शहीदी दिवस श्रद्धा और भावुकता के साथ मनाया जाता है।
गुरुद्वारा शहीदाने गुजरात ट्रेन का निर्माण उन 2600 निर्दोष हिंदू और सिख यात्रियों की स्मृति में किया गया, जो भारत-पाक विभाजन के समय पाकिस्तान से भारत आते हुए शहीद हुए थे।
इतिहास की दर्दनाक कहानी
विभाजन के बाद पाकिस्तान से भारत लौटते समय, 10 जनवरी 1948 को पाकिस्तान के बन्नू शहर से एक ट्रेन भारत के लिए रवाना हुई, जिसमें लगभग 3600 हिंदू और सिख यात्री सवार थे। यात्रियों की सुरक्षा के लिए आर्मी के जवान तैनात किए गए थे। लेकिन ट्रेन का रास्ता बदल दिया गया और 12 जनवरी 1948 को ट्रेन गुजरात स्टेशन पर रुकी।
घात लगाए हमलावरों ने यात्रियों पर अंधाधुंध गोलियां चलाई। आर्मी के जवानों ने जवाबी कार्रवाई की, लेकिन गोलियां खत्म होने पर हमलावरों ने ट्रेन पर धावा बोल दिया। इस हमले में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों समेत 2600 लोग शहीद हुए।
बचकर आए कुछ यात्री और गुरुद्वारे का निर्माण
इस नरसंहार से बचकर आए कुछ यात्री—सुरेंद्र सिंह, भोला सिंह और तारा सिंह—फरीदाबाद में बस गए। उन्होंने मिलकर गुरुद्वारा शहीदाने गुजरात ट्रेन का निर्माण करवाया। तब से हर साल यहां तीन दिवसीय कार्यक्रम और शहीदी दिवस आयोजित किया जाता है।गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के अनुसार यह स्थल न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि देशभक्ति और बलिदान का जीवंत प्रतीक भी है।
