शिमला:इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब आम जनजीवन के साथ-साथ विकास कार्यों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। जहां एक ओर एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है, वहीं अब सड़क निर्माण में उपयोग होने वाले लाइट डीजल ऑयल (एलडीओ) के दामों में भारी उछाल ने नई परेशानी खड़ी कर दी है। हिमाचल प्रदेश में इस बढ़ती कीमत का सीधा असर सड़क निर्माण कार्यों पर पड़ रहा है।
प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) फेस-3 के तहत कई सड़कों का मेटलिंग और टायरिंग कार्य जारी था, लेकिन एलडीओ महंगा होने के कारण ठेकेदारों ने काम रोकना शुरू कर दिया है। दरअसल, जब इन परियोजनाओं के टेंडर जारी किए गए थे, उस समय एलडीओ की कीमतें कम थीं, लेकिन अब अचानक आई बढ़ोतरी से लागत काफी बढ़ गई है। इससे ठेकेदारों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते एलडीओ की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है। सड़क निर्माण में तारकोल के साथ एलडीओ का इस्तेमाल जरूरी होता है, जिससे इसकी लागत और बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि नाबार्ड के तहत बनने वाली सड़कों की लागत में भी बड़ा इजाफा हुआ है।तीन मीटर चौड़ी सड़क की लागत जहां पहले प्रति किलोमीटर लगभग 13.75 लाख रुपये थी, वह अब बढ़कर करीब 17 लाख रुपये हो गई है। वहीं, छह मीटर सड़क की लागत 27.50 लाख से बढ़कर 35.8 लाख और दस मीटर सड़क की लागत 41.25 लाख से बढ़कर 53.25 लाख रुपये तक पहुंच गई है।मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाए और बढ़ी हुई लागत के लिए अतिरिक्त बजट की मांग की जाए, ताकि रुके हुए कार्य दोबारा शुरू हो सकें।
