उत्तराखंड (एकता): विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री धाम उत्तराखंड के चार धाम तीर्थ यात्रा में चार स्थलों में से एक है। श्रद्धालुओं की इसके प्रति गहरी आस्था है। बता दें कि अब गंगोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए 15 नवंबर यानि मंगलवार को बंद हो रहे हैं। हालांकि मंदिर को फूलों से सजाया जा रहा है। भैया दूज पर भगवान बदरी नारायण के कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उत्तराखंड के चारधाम गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट बंद होने से भक्त अब 6 महीने तक माता के दर्शनों का दीदार नहीं कर पाएंगे। अन्नकूट के पावन पर्व पर अभिजीत मुहूर्त की शुभ बेला पर 11 बजकर 45 मिनट पर बंद किए जाएंगे। जो श्रद्धालु इसका हिस्सा बनना चाहते हैं वह मंदिर आकर इसका दीदार कर सकते हैं।

फूलों से सजाया गया यमुनोत्री धाम
बताया जा रहा है कि कपाट बंदी के लिए गंगोत्री व यमुनोत्री धाम को बड़े ही प्यार के साथ फूलों से सजाया गया है। 14 नवंबर यानि आज से मां गंगा की उत्सव डोली अपने मायके मुखीमठ मुखबा के लिए विदा होगी। रात को वह देवी मंदिर में ही रूकेगी।

मां गंगोत्री का बेटी की तरह किया जाएगा स्वागत
15 नवंबर को मां गंगोत्री की उत्सव डोली विराजमान होगी। गांव के ग्रामीण उनका बेटी की तरह भव्य स्वागत करेंगे। इसकी पूजा मुखबा स्थित गंगा मंदिर में होगी।

जानें कब बंद होंगे केदारनाथ के कपाट
खास बात यह है कि केदारनाथ धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट भैया दूज के अवसर पर 15 नवंबर को बंद होने जा रहे हैं। जिसको लेकर सभी तैयारियों में जुटे हुए हैं। हालांकि बदरी नारायण के कपाट बंद होने का कार्य मंगलवार से शुरू होगा। 18 नवंबर को बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होंगे। पूजा-अर्चना के बाद शीतकाल के लिए दोपहर 3 बजे से बंद हो जाएंगे। वहीं दूसरी ओर केदारनाथ मंदिर श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेगा। उसके बाद शाम 4 बजे फिर से भक्तों के लिए खोला जाएगा। ताकि भक्त दर्शन कर सकें।
गंगोत्री धाम का क्या महत्व है
गंगोत्री गंगा नदी का उद्गम स्थल है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां गंगा जब पहली बार स्वर्ग से धरती पर उतरी थी, तब इसी स्थान पर भगवान शिव ने गंगा मैया को अपनी जटाओं में धारण किया था। उत्तराखंड के गढ़वाल में गंगोत्री हिमनद से गंगा नदी निकलती है। हालांकि समुद्रतल से इसकी ऊंचाई 3042 मीटर है। भक्तं की इसके प्रति गहरी आस्था बनी हुई है।
