Shimla,Kartik-प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल IGMC के कैंसर विभाग में दवाइयों की भारी किल्लत के चलते मरीजों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।कीमोथेरेपी की जरूरी दवाएं अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं,जिसके कारण मरीजों को लाखों रुपये खर्च कर बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं।
हिमकेयर और आयुष्मान भारत जैसी सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं भी इन परिस्थितियों में बेअसर साबित हो रही हैं।मरीजों और उनके तीमारदारों का आरोप है कि कार्ड होने के बावजूद उन्हें अस्पताल से जरूरी दवाएं नहीं मिल रहीं।एक मरीज ने बताया,”सरकार कहती है कि कैंसर की दवाइयां मुफ्त मिलेंगी, लेकिन यहां इंजेक्शन तक नहीं हैं। डॉक्टर दवाई लिखते हैं, पर बाहर से खरीदनी पड़ती है जो बेहद महंगी है।”
बाजार में लाखों की कीमत..अस्पताल में शून्य स्टॉक
अस्पताल में 40 हज़ार रुपये से अधिक कीमत वाली कीमोथेरेपी दवाइयों का स्टॉक खत्म हो चुका है।जन औषधि केंद्र भी यह दवाइयां उपलब्ध नहीं करवा पा रहा है।मरीजों और परिजनों ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि या तो सरकार कार्ड बंद करे या फिर इलाज के लिए जरूरी दवाएं तुरंत उपलब्ध कराए।
प्रशासन ने पेमेंट रुकने को ठहराया जिम्मेदार
IGMC प्रशासन का कहना है कि बीते कई महीनों से वेंडरों को भुगतान नहीं हो पाया है,जिस वजह से दवाइयों की आपूर्ति प्रभावित हुई है।
प्रशासन के अनुसार: “जैसे ही भुगतान की प्रक्रिया पूरी होगी, दवाओं की उपलब्धता बहाल कर दी जाएगी।”
सवालों के घेरे में स्वास्थ्य व्यवस्था
यह स्थिति प्रदेश की स्वास्थ्य योजनाओं और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जब कैंसर जैसे गंभीर रोग के इलाज के लिए भी मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर का रुख करना पड़े, तो यह जनस्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती है।
