शिमला,संजू-:शिमला में आयोजित एक संयुक्त पत्रकार वार्ता में हिमाचल प्रदेश सरकार के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के हालिया प्रदेश दौरे को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।दोनों मंत्रियों ने कहा कि राज्यवासियों को इस दौरे से काफी अपेक्षाएं थीं,विशेषकर प्रदेश की आर्थिक चुनौतियों के समाधान को लेकर, लेकिन दौरे के दौरान वित्तीय मामलों पर कोई ठोस चर्चा सामने नहीं आई।
रोहित ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश इस समय आर्थिक दबावों का सामना कर रहा है और ऐसे हालात में केंद्र सरकार के वरिष्ठ नेताओं से उम्मीद थी कि वे राज्य की वित्तीय जरूरतों और राहत उपायों पर खुलकर चर्चा करेंगे।उन्होंने कहा कि प्रदेश को पहले मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान बंद हो चुका है,जिसका असर राज्य की आर्थिक स्थिति पर पड़ा है।इसके साथ ही राज्य की ऋण लेने की क्षमता पर भी सीमाएं निर्धारित की गई हैं,जिससे विकास योजनाओं के संचालन में चुनौतियां बढ़ी हैं।तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूर्व में घोषित 1500 करोड़ रुपये की सहायता राशि अब तक राज्य को प्राप्त नहीं हुई है।उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री प्रदेश का दौरा करते हैं तो लोगों को उम्मीद रहती है कि वे विकास और आर्थिक मजबूती के लिए कुछ सकारात्मक घोषणाएं करेंगे।
धर्माणी ने कहा कि प्रदेश के हित से जुड़े महत्वपूर्ण वित्तीय मामलों पर स्पष्टता और कार्रवाई की आवश्यकता है।दोनों मंत्रियों ने कहा कि जेपी नड्डा केंद्र सरकार में एक प्रभावशाली पद पर हैं और हिमाचल प्रदेश को उनसे विशेष सहयोग की अपेक्षा रहती है। उन्होंने दावा किया कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हिमाचल देश के अग्रणी राज्यों में गिना जाता है,लेकिन इसके बावजूद केंद्र से मिलने वाली आर्थिक सहायता अपेक्षाकृत सीमित है।उन्होंने आयुष्मान भारत योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य को इसके तहत मिलने वाली सहायता उसकी आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है।प्रेस वार्ता के दौरान मंत्रियों ने भाजपा पर भी राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि पार्टी प्रदेश में मुद्दों के बजाय बयानबाजी पर अधिक ध्यान दे रही है।उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान,ऋण सीमा और लंबित सहायता राशि जैसे विषयों पर केंद्र सरकार को अपना स्पष्ट रुख सामने रखना चाहिए ताकि प्रदेश की आर्थिक चुनौतियों का समाधान संभव हो सके।
