Karnal,19 November-:करनाल स्थित राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) ने भारतीय मिठाइयों को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। संस्थान ने देश में पहली बार पारंपरिक दूध की मिठाई बर्फी को 3-डी प्रिंटिंग तकनीक से तैयार करने का सफल प्रयोग किया है।यह उपलब्धि भारतीय मिठाइयों को टेक्नोलॉजी से जोड़ते हुए एक बिल्कुल नया आयाम दे रही है।
अब मनचाही बर्फी एक क्लिक पर
संस्थान द्वारा विकसित टेक्नोलॉजी में खोया,चीनी और हाइड्रोकोलॉइड आधारित खाद्य पेस्ट को 3-डी प्रिंटर में भरा जाता है।ग्राहक अपने मोबाइल या कंप्यूटर से मिठाई की शक्कर की मात्रा,फ्लेवर (गाजर, चुकंदर, आम, चॉकलेट आदि) और डिजाइन चुन सकेंगे।निर्देश मिलते ही प्रिंटर माइक्रोन-स्तरीय सटीकता से बर्फी को परत-दर-परत तैयार करेगा—पूरी तरह ताज़ा और बिना हाथ लगे।
स्वास्थ्य-सचेत लोगों के लिए नई उम्मीद
एनडीआरआई की टीम कम कैलोरी वाली मिठाइयों पर भी शोध कर रही है।डायबिटीज़ प्रभावित उपभोक्ताओं के लिए लो-शुगर विकल्प विकसित किए जा रहे हैं।
कम वसा, हाई-प्रोटीन और शुगर-कंट्रोल जैसी विशेष श्रेणियाँ भी इसी तकनीक से संभव होंगी।
डिज़ाइन में अनगिनत संभावनाएँ
यह तकनीक त्योहारों,जन्मदिनों या विशेष आयोजनों के लिए नाम,लोगो,संदेश और जटिल कलात्मक डिज़ाइन वाली बर्फी बनाना आसान कर देगी।ऐसे डिज़ाइन जिन्हें हाथों से बनाना मुश्किल रहा है,अब कुछ ही मिनटों में तैयार किए जा सकेंगे।
भविष्य की मीठी राह
संस्थान की रिसर्च टीम अब पेड़ा, संदेश और अन्य दूध आधारित मिठाइयों के लिए भी प्रिंटेबल पेस्ट विकसित कर रही है।साथ ही,घरेलू उपयोग के लिए 3-डी मिठाई प्रिंटर तैयार करने पर भी काम जारी है,जिससे भविष्य में घर-घर टेक-बेस्ड मिठाइयों का दौर शुरू हो सकता है।
प्रमुख वैज्ञानिकों की प्रतिक्रियाए
डॉ. धीर सिंह, निदेशक, एनडीआरआई
“यह तकनीक हमारी पारंपरिक मिठाइयों को आधुनिक परिशुद्धता और स्वच्छता के साथ जोड़ने वाला बड़ा कदम है। इससे उपभोक्ताओं को कस्टमाइज्ड और पौष्टिक विकल्प मिल सकेंगे।”
डॉ. कौशिक खमरुई, प्रधान अन्वेषक
“अब तक बर्फी केवल हाथों से बनती थी,लेकिन 3-डी प्रिंटिंग से डिज़ाइन और स्वाद की असीम संभावनाएँ खुल गई हैं। आगे कई और भारतीय मिठाइयों को इस टेक्नोलॉजी से जोड़ने पर काम चल रहा है।
