धर्मशाला,राहुल चावला:राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने धर्मशाला में केंद्र सरकार,नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एनटीए के चेयरमैन तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। धर्मशाला में पत्रकार वार्ता करते हुए एनएसयूआई के पदाधिकारी ने आरोप लगाते हुए कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था लगातार पतन की ओर बढ़ रही है और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन में गंभीर खामियां सामने आ रही हैं,
जिससे लाखों छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
एनएसयूआई नेताओं ने कहा कि नीट,जेईई, नेट सहित विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर लगातार विवाद सामने आ रहे हैं। इससे अभ्यर्थियों का परीक्षा प्रणाली पर विश्वास खत्म होता हुआ नजर आ रहा है। संगठन के अनुसार वर्ष 2018 से 2026 तक करीब 18 करोड़ अभ्यर्थी एनटीए द्वारा आयोजित विभिन्न परीक्षाओं में शामिल हुए हैं,लेकिन एजेंसी की कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में रही है।एनएसयूआई ने आरोप लगाया कि एनटीए के चेयरमैन प्रोफेसर प्रदीप कुमार जोशी की नियुक्ति से पहले उनके कार्यकाल और उनसे जुड़े विवादों की पर्याप्त जांच नहीं की गई। संगठन का कहना है कि किसी व्यक्ति की विचारधारा से उन्हें आपत्ति नहीं है,लेकिन शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित होना आवश्यक है।छात्र संगठन ने मांग की कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री और एनटीए चेयरमैन दोनों नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दें।साथ ही एनटीए की गवर्निंग बॉडी को भंग कर योग्य और निष्पक्ष लोगों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी जाए, ताकि छात्रों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय न हो और परीक्षा प्रणाली को भी सुधर जा सके।
एनएसयूआई के पदाधिकारी अमर कुमार का कहना है कि देशभर में छात्र संगठन इन मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं और जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री तथा एनटीए चेयरमैन को पद से नहीं हटाया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।इस दौरान संगठन ने केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश से जुड़े हालिया मामलों पर भी चिंता जताई।एनएसयूआई ने आरोप लगाया कि एनसीईआरटी की एक पुस्तक में राष्ट्रीय ध्वज को गलत तरीके से प्रकाशित किया गया, जिसके खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। इसके अलावा केंद्रीय विश्वविद्यालय में कथित पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के मामलों की निष्पक्ष जांच की भी मांग उठाई गई।एनएसयूआई का कहना है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी जैसी प्रतिष्ठित संस्था पर देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आयोजित कराने की जिम्मेदारी है। यदि ऐसी संस्था लगातार विवादों में घिरी रहती है तो छात्रों का पूरे शिक्षा तंत्र से भरोसा उठना स्वाभाविक है।संगठन ने केंद्र सरकार से शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
