राहुल चावला , धर्मशाला – कोलकाता घटना के विरोध में चल रही डाक्टर्स की हड़ताल के खत्म होने पर जोनल अस्पताल धर्मशाला में ओपीडी सुचारु रूप से चली,हालांकि संभावना जताई जा रही थी कि करीब तीन दिन बाद ओपीडी खुलने पर मरीजों की संख्या में भारी इजाफा होगा, लेकिन ऐसा कुछ नजर नहीं आया,ओपीडी खुलने पर सामान्य संख्या में ही मरीज उपचार हेतू अस्पताल पहुंचे थे।
अस्पताल प्रशासन की मानें तो स्ट्राइक के दौरान भी जो मरीज यहां पहुंचे थे, उन्हें बिना चेकअप के वापिस न लौटना पड़े, इसके लिए एमरजेंसी सेवाएं जारी रखी गई थी और अतिरिक्त डाक्टर्स भी तैनात किए गए थे। सामान्य बीमारियों के अतिरिक्त गंभीर बीमारियों से पीडि़त मरीजों को भी किसी तरह की परेशानी न हो, इसका ख्याल रखा गया। जानकारी के अनुसार बरसात के दिनों में वायरल फीवर व स्किन एलर्जी के रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। एक अनुमान के अनुसार ऐसे मरीजों की संख्या 40 से 50 फीसदी रहती है।
1100 तक रहती है ओपीडी
धर्मशाला अस्पताल में हर दिन औसतन 1000 से 1100 मरीज उपचार व चेकअप के लिए पहुंचते हैं। एक या दो छुटिटयों के बाद जब अस्पताल खुलता है तो ओपीडी 1300 से 1500 तक पहुंच जाती है। लेकिन स्ट्राइक ख़त्म होने के बाद अस्पताल में मरीज ज्यादा नहीं पहुंचे। इसका कारण यह भी हो सकता है कि लोगों को अभी यह जानकारी ही नहीं हो कि डाक्टर्स की हड़ताल खत्म हो चुकी है। सामान्य दिनों की बात करें तो दोपहर एक बजे तक अस्पताल परिसर में मरीजों की भीड़ लगी रहती है, जबकि बुधवार को ऐसा कुछ नजर नहीं आया।
बरसात के दिनों में वायरल फीवर व स्किन एलर्जी सहित जलजनित रोगों के ज्यादा मरीज रहते हैं। बरसात में 40 से 50 फीसदी मरीज जो अस्पताल पहुंचते हैं, वो इन बीमारियों से ही पीडि़त होते हैं। स्ट्राइक के दौरान अस्पताल पहुंचे मरीजों को उपचार एमरजेंसी के माध्यम से उपलब्ध करवाया गया। एमरजेंसी में अतिरिक्त डाक्टर्स तैनात किए गए थे।
