कैथल(TSN): केंद्र सरकार की ओर से चावल पर एक्स्पोर्ट रेट वेल्यू बढ़ाने पर मिलर्स व एक्पोर्टर्स मंडियों में बारीक किस्म की धान नहीं खरीद रहे हैं। धान की खरीद न होने से किसान परेशान हैं। शहर की दोनों अनाज मंडियों में करीब 38 हजार क्विंटल बारीक किस्म की धान खुले आसमान के नीचे ढेरियों में पड़ी हैं। इनमें 1401, 1718, 1509 व 1121 किस्म शामिल हैं। सैंकड़ों किसान मंडियों में फसल का पहरा दे रहे हैं। वहीं मौसम भी किसानों की परेशानी को बढ़ा रहा हैं।
सोमवार को हुई ओलों के साथ बारिश ने किसानों पर दोहरी मार कर दी हैं। एक तरफ तो फसल नहीं बिक रही थी और दूसरी तरफ खुले में पड़ी धान की भीगने से क्वालिटी खराब हो गई। इसमें डैमेज व डिस्कलर से लेकर अन्य प्रकार के फाल्ट पैदा हो रहे हैं। हड़ताल कितना लंबा चलेगी इस बात का भी अभी कुछ पता नहीं हैं। फसल लंबें समय तक ऐसे ही पड़ी रह सकती हैं, जिस कारण इन फसलों का उस स्तर का रेट व्यापारी नहीं लगाएंगे। जो फिलहाल होना चाहिए। इससे किसानों को मोटा नुकसान हो सकता हैं।
गांव क्वारतन से मंडी पहुंचे किसान मनदीप ने बताया कि वह मंडी में डीपी 1401 क्वालिटी की फसल लेकर आया था। पिछले 5 दिन से बैठा हैं।ल, कोई फसल को खरीदने नहीं आया। बारिश से फसल बुरी तरह भीग गई। अब धरती में बिछाकर फसल सुखा रहा हूं। उन्होंने कहा कि हमारा क्या कसूर हैं। सरकार भी किसानों का दर्द नहीं समझ रही हैं। यहां क्या खाएं, कैसे सोएं सब दिक्कत हैं।
गांव मालखेड़ी के किसान दिलबाग ने बताया कि वह दो दिन पहले बारीक धान मंडी में लेकर आया था। बारिश हो गई, धान भीग गई। कोई खरीदने वाला नहीं हैं। बारिश से क्वालिटी भी बिगड़ गई हैं। उन्होंने कहा कि हमारी कोई सुनने वाला नहीं हैं, त्योहारी सीजन आने वाला हैं और फसल नहीं बिकी तो कैसे खर्च उठाया जाएगा।
पिछले तीन दिनों से पीआर धान की आवक बहुत कम हुई
मंगलवार और बुधवार को मंडियों में पीआर धान की आवक काफी कम रही। इसका बड़ा कारण सोमवार को हुई बारिश रहा, क्योंकि खेतों में पानी हो गया हैं, जिस कारण फसलों की कटाई प्रभावित हो रही हैं मंडियों के एंट्री गेटों पर मंगलवार को फसल से भरे ट्रैक्टर -ट्राली भी बहुत कम संख्या में पहुंचे। दोनों मंडियों की बात करें तो फिलहाल करीब 60 हजार बैग के करीब पीआर धान अनशोल्ड पड़ी हैं।
बारिश से भीगी पीआर धान को मिलर्स कर रहे रिजेक्ट
बारिश से भीगी पीआर धान को मिलर्स चेक करते ही रिजेक्ट कर रहे हैं, जबकि किसानों का कहना है कि मंडी में फसल भीगी, इसमें किसानों का तो कोई कसूर नहीं हैं। फसल गीली होने के कारण मंगलवार को ज्यादा मात्रा में खरीद भी नहीं हुई।
धान की ढेरियों को बिछाकर सुखाने का प्रयास कर रहे किसान
मंडियों में जगह देखकर किसान भीगी हुई धान की ढेरियों को सुखाने के लिए बिछा रहे हैं, ताकि फसल को हवा व धूप लग सके, जिससे उसकी नमी सामान्य हो सके। लेकिन ज्यादातर ढेरियां इस तरीके से भीगी हुई है कि उनको सुखाना मुश्किल हो गया।
मंडी प्रशासन के अधिकारी नही ले रहे कोई सुध..
किसानों का कहना है कि वह पिछले 5 दिनों से मंडी में आए हुए हैं, परंतु मंडी प्रशासन की तरफ से कोई भी अधिकारी उनकी सुध लेने नहीं पहुंचा हैं। देश का पेट भरने वाले किसान को चारों तरफ की मार पड़ रही हैं। इस दुख की घड़ी में सरकार के साथ प्रशासन भी उनसे मुंह मोड़ चुका हैं, इसलिए वह भूखे प्यासे 5 दिन से ही अपनी 6 महीने के खून पसीने की कमाई को लेकर मंडी में बैठे हुए हैं।
