Karnal, 31 December-:हरियाणा पुलिस के महानिदेशक रहे ओपी सिंह के सेवानिवृत्त होने पर करनाल स्थित हरियाणा पुलिस अकादमी, मधुबन में एक ऐतिहासिक, भव्य और भावनात्मक विदाई समारोह का आयोजन किया गया। यह अवसर केवल एक वरिष्ठ अधिकारी की विदाई नहीं था, बल्कि हरियाणा पुलिस में ईमानदार, निर्भीक और सशक्त नेतृत्व के एक युग के समापन का प्रतीक बन गया।
गार्ड ऑफ ऑनर और रस्सी से खिंची कार ने बनाया भावुक माहौल
मधुबन पुलिस अकादमी पहुंचने पर डीजीपी ओपी सिंह को पूरे सैन्य सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। समारोह के दौरान पुलिस अधिकारियों और जवानों ने उनकी कार को रस्सी से खींचकर उन्हें सम्मानपूर्वक विदाई दी। यह दृश्य न केवल भावनात्मक था, बल्कि पुलिस बल के भीतर उनके प्रति गहरे सम्मान, विश्वास और आत्मीयता को भी दर्शाता था।
‘रिटायर’ शब्द स्वीकार्य, लेकिन ‘टायर्ड’ नहीं: ओपी सिंह
मीडिया से बातचीत के दौरान ओपी सिंह ने अपने सेवा जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें ‘रिटायर’ शब्द से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उसमें छिपे ‘टायर्ड’ शब्द से ऐतराज है। उन्होंने कहा कि इंडियन पुलिस सर्विस में आने का जो सपना होता है, उसे उन्होंने पूरी ईमानदारी, संतोष और समर्पण के साथ जिया है। उनके अनुसार, पुलिस व्यवस्था किसी एक व्यक्ति के जाने से समाप्त नहीं होती, यह एक सतत और जीवंत प्रणाली है।
डीजीपी कभी रिटायर नहीं करता, लोग आते-जाते रहते हैं
अपने स्पष्ट और बेबाक अंदाज में ओपी सिंह ने कहा, “मैं मैन ऑफ द मोमेंट हूं। डीजीपी कभी रिटायर नहीं करता, लोग आते-जाते रहते हैं।” उन्होंने आने वाले अधिकारियों को संदेश देते हुए कहा कि अपराधियों से 36 का आंकड़ा बनाए रखना होगा, ठगों पर लगातार दबाव बनाए रखना होगा और आम जनता के साथ सम्मानजनक व्यवहार ही प्रभावी पुलिसिंग की असली पहचान है।
अपराध केवल पुलिस की नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी
ओपी सिंह ने कहा कि अपराध से लड़ाई केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। सभ्य समाज में ठगी, बदमाशी और डर के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। यह लड़ाई सिर्फ पुलिस के गले में डाल दी गई है, जबकि समाज को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्होंने बताया कि आज एक्सटॉर्शन, किडनैपिंग और कॉन्ट्रैक्ट किलिंग एक संगठित अपराध के रूप में उभर चुके हैं, जिनमें सोशल मीडिया, एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री और छोटे बदमाश मिलकर डर का माहौल बनाते हैं।
एक फोन कॉल से सिस्टम को सबसे ज्यादा नुकसान
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि केवल एक फोन कॉल से ऐसा माहौल बना दिया जाता है जैसे सब कुछ खत्म हो गया हो। बाकी अपराध एक तरफ, लेकिन इस तरह के डर ने पूरे सिस्टम को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में अपराधियों के खिलाफ खड़े होना, आवाज उठाना और पुलिस को सूचना देना हर नागरिक का कर्तव्य है।
हर नागरिक बिना वर्दी का सिपाही
पुलिस व्यवस्था की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए ओपी सिंह ने कहा कि हर नागरिक बिना वर्दी का एक सिपाही है। नए आपराधिक कानूनों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को अपराध की जानकारी होते हुए भी वह पुलिस को सूचित नहीं करता, तो उसे भी दोषी माना जाएगा।
जूनियर अधिकारियों को संदेश: पुलिस सेवा है ड्रीम करियर
अपने संबोधन में उन्होंने जूनियर अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यह अब ‘लाट साहबों’ का देश नहीं रहा। अंग्रेज जा चुके हैं और यह संस्था जनता के टैक्स के पैसों से चलती है। पुलिस का कर्तव्य है कि वह ठगों और बदमाशों को जेल तक पहुंचाए। उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा एक शानदार और ड्रीम करियर है, जहां समस्या सुलझाने वाले और मूल्य सृजित करने वाले अधिकारियों की सबसे अधिक आवश्यकता है।
कबीर के दोहे के साथ विदाई संदेश
अपने अंतिम वक्तव्य में डीजीपी ओपी सिंह ने संत कबीर दास की पंक्ति के साथ विदाई संदेश दिया—
“दास कबीर जतन से ओढ़ी, ज्यों की त्यों धर दीनी चदरिया।”
यह पंक्ति उनके पूरे सेवा जीवन की सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा को बखूबी प्रतिबिंबित करती नजर आई।
