मंडी-:पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार को विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (विबी-जी रामजी) योजना को लेकर भ्रम फैलाने के बजाय इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देना चाहिए। उनका कहना है कि योजना के संबंध में सरकार द्वारा लगाए गए दिहाड़ी में कमी, अनुदान घटाने और प्रशासनिक खर्च कम किए जाने जैसे आरोप तथ्यहीन साबित हुए हैं।
मंडी से जारी बयान में जयराम ठाकुर ने कहा कि यदि राज्य सरकार योजना को गंभीरता से लागू करती है तो बेहतर प्रदर्शन के आधार पर मिलने वाली 20 प्रतिशत “परफॉर्मेंस ग्रांट” का लाभ भी हिमाचल प्रदेश को मिल सकता है।उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने प्रदर्शन आधारित अनुदान को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया है और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से ही राज्य को इसका लाभ मिलेगा।उन्होंने कहा कि कांग्रेस शुरू से ही विबी-जी रामजी योजना का विरोध कर रही है और बिना प्रावधानों को समझे इसके खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है।उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के मंत्री भी तथ्यों की अनदेखी कर जनता को गुमराह कर रहे हैं।जयराम ठाकुर ने दावा किया कि हिमाचल प्रदेश को चालू वित्तीय वर्ष के पहले नौ महीनों के लिए 1203 करोड़ रुपये का अनुदान स्वीकृत हुआ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 300 करोड़ रुपये अधिक है। उन्होंने यह भी कहा कि योजना के तहत मिलने वाली दिहाड़ी मनरेगा से अधिक है।नेता प्रतिपक्ष के अनुसार,विबी-जी रामजी योजना में प्राकृतिक आपदाओं और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए आश्रय स्थल,तटबंध,बाढ़ नियंत्रण संरचनाएं,पुनर्वास कार्य और वनाग्नि प्रबंधन जैसे कार्यों का प्रावधान है।उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं की चुनौती को देखते हुए सरकार को इन प्रावधानों का अधिकतम लाभ उठाना चाहिए।उन्होंने कहा कि योजना में रोजगार की पारदर्शिता,समय पर भुगतान,रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 दिन करने तथा निर्माण कार्यों में केंद्र की हिस्सेदारी बढ़ाने जैसे प्रावधान शामिल हैं।उनके अनुसार,सरकार को राजनीतिक बयानबाजी छोड़कर योजना के बेहतर क्रियान्वयन पर ध्यान देना चाहिए ताकि प्रदेश और ग्रामीण क्षेत्रों को इसका अधिकतम लाभ मिल सके।
