शिमला-:हिमाचल प्रदेश में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पिछले 1079 दिनों से आंदोलन कर रहे दृष्टिबाधित युवाओं ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।मंगलवार को बड़ी संख्या में दृष्टिबाधित प्रदर्शनकारियों ने सचिवालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया।प्रदर्शनकारियों ने सरकार को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि आज उनकी मांगों को लेकर वार्ता नहीं की गई,तो वे दिल्ली कूच करेंगे और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के आवास का घेराव करेंगे। आंदोलनकारियों का आरोप है कि लंबे समय से कई दौर की वार्ता के बावजूद उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।खास तौर पर दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित बैकलॉग पदों को भरने की मांग लगातार उठाई जा रही है।
दृष्टिबाधित संघ के सदस्य राजेश ठाकुर ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि दिव्यांगजन पिछले 1079 दिनों से अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं,लेकिन उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।उन्होंने सरकार के ‘सरकार गांव के द्वार’ कार्यक्रम पर तंज कसते हुए सवाल किया कि जब दिव्यांगजन सचिवालय के बाहर बैठे हैं,तो सरकार को उनकी आवाज क्यों सुनाई नहीं दे रही।प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद विभिन्न विभागों में दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित करीब 1009 बैकलॉग पदों को भरने की प्रक्रिया में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई जा रही है। राजेश ठाकुर ने कहा कि दिव्यांगजन सरकार से किसी तरह की सहानुभूति या भीख नहीं,बल्कि अपने अधिकार और सम्मान के साथ रोजगार का अवसर चाहते हैं।उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को चुनौती देते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री ब्रेल लिपि में ‘A से Z’ तक लिखकर दिखा दें,तो वे उसी समय अपना आंदोलन समाप्त करने को तैयार हैं।राजेश ठाकुर ने कहा कि यदि सरकार ने तत्काल वार्ता नहीं की,तो आंदोलनकारी दिल्ली जाकर राहुल गांधी के आवास का घेराव करेंगे।इसके साथ ही प्रधानमंत्री और दिव्यांगता आयुक्त को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपने की बात भी कही गई है।उन्होंने कहा कि 27 अक्टूबर को प्रस्तावित उच्च न्यायालय की सुनवाई में यदि कोई सकारात्मक समाधान नहीं निकलता है,तो आंदोलनकारी हिमाचल प्रदेश के विभिन्न मंदिरों में जाकर सरकार को सद्बुद्धि देने के लिए विशेष प्रार्थना करेंगे।प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
