Delhi, 23 October-भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर मानवीय मूल्यों और वैश्विक एकजुटता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) की 151वीं सभा में भारतीय संसद का प्रतिनिधित्व करते हुए सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि “भारत संकट के समय में भी मानवता, तटस्थता, निष्पक्षता और स्वतंत्रता जैसे मूल मानवीय सिद्धांतों के प्रति अडिग है।”
“संकट के समय में मानवीय मानदंडों का पालन और मानवीय कार्यों का समर्थन” विषय पर संबोधन देते हुए श्री ठाकुर ने 170 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के समक्ष भारत की सभ्यतागत विरासत और मानवीय दृष्टिकोण को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत की मानवीय भागीदारी संप्रभुता, अहस्तक्षेप और नैतिक जिम्मेदारी के सिद्धांतों से निर्देशित होती है।अनुराग ने बढ़ते वैश्विक संघर्षों, प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय ढांचे पर बढ़ते दबाव की पृष्ठभूमि में चेताया कि बहुपक्षीय सहयोग और मानवीय वित्त पोषण में गिरावट चिंता का विषय है। उन्होंने वैश्विक संस्थानों में व्यापक सुधार की मांग करते हुए कहा कि इन संस्थानों को “अधिक समावेशी और प्रतिनिधि” बनाया जाना चाहिए, ताकि वैश्विक दक्षिण की आवाज़ भी प्रभावी रूप से सुनी जा सके।
भारत के मानवीय योगदान पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि भारत ने 49 संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में 2 लाख से अधिक कर्मियों की सेवा दी है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने “वैक्सीन मैत्री” पहल के तहत 100 से अधिक देशों को 301 मिलियन से अधिक टीके भेजकर मानवता की सेवा की।उन्होंने “ऑपरेशन ब्रह्मा” (म्यांमार, 2025) और “ऑपरेशन सद्भाव” (पश्चिम एशिया) जैसी हालिया मानवीय कार्रवाइयों का भी उल्लेख किया, जो भारत की तत्परता और वैश्विक जिम्मेदारी की मिसाल हैं।
घरेलू स्तर पर अनुराग ठाकुर ने भारत के आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) के 16,000 से अधिक प्रशिक्षित कर्मियों ने अब तक 1.59 लाख लोगों की जान बचाई और 8.64 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया है।उन्होंने कहा कि भारत का दृष्टिकोण “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” केवल घरेलू नीति नहीं, बल्कि वैश्विक मानवीय सहयोग का आधार है।
