अगर फसल कटाई के समय कुछ खास बातों का रखा जाए ध्यान..क्वालिटी और उपज दोनों में होगा इजाफा

करनाल,08 April-गेहूं की कटाई और भंडारण में अगर किसान भाई कुछ सावधानियां पर ध्यान दें तो गेहूं को नुकसान से बचा जा सकता है।राष्ट्रीय गेहूं एवं जौं अनुसंधान संस्थान करनाल के निदेशक डॉ रत्तन तिवारी ने बताया कि गेहूं की कटाई का समय, साथ ही फसल में नमी की मात्रा, उपयोग की जाने वाली तकनीक अहम कारक हैं। एक अनुमान के अनुसार, गेहूं के भंडारण में कुल हानि लगभग 33.5 फीसदी होने की संभावना है, जबकि कटाई और मड़ाई के काम में लगभग 17 फीसदी का नुकसान होता है. इसलिए, यह जरूरी है कि गेहूं की कटाई से लेकर भंडारण तक कार्यों को सही तरीके से किया जाए।

लहलहाती गेहूं की बालियां पक कर कटने को तैयार हैं तो कई जगहों पर काटी भी जा रही है लेकिन इनकी कटाई कब करें? कैसे करें। डॉ रत्तन तिवारी ने बताया कि कई बार किसान इनकी कटाई पकने से पहले कर देते हैं, जिससे उनकी उपज बाद में सूखकर सिकुड़ जाती है। या देर होने पर खेतों में ही झड़ने लगती है जिसका खामियाजा किसान को कम उपज या गुणवत्ताहीन उपज के रूप में मिलती है। कटाई का समय, फसल में नमी की मात्रा, उपयोग की जाने वाली तकनीक (मैनुअल या मैकेनिकल) अहम कारक हैं जो उपज की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।

एक तरफ जहां अधिक नमी पर कटाई करने से गेहूं में फफूंद का विकास हो जाता है, दूसरी तरफ गेहूं की बाली ज्यादा सूख जाती है तो अनाज के टूटने के कारण हानि हो सकती है। कटाई और मड़ाई के खराब शेड्यूल, अनाज की नमी के कारण बाजार में बेचने में दिक्कत आ सकती है। पर अगर कटाई के समय कुछ खास बातों का ध्यान रखा जाए, जैसे फसल की कटाई किस अवस्था पर करें, फसल की कटाई का तरीका क्या हो और फसल का भंडारण कैसे किया जाए, तो इन सवालों के सही जवाब से आपकी फसल की क्वालिटी और उपज दोनों बढ़ जाएगी।

कब करें गेहूं की कटाई?

गेहूं के पकने की अवस्था का अनुमान किसान अपने अनुभव के आधार पर लगा सकते हैं। जैसे फसल पकने पर पत्तियां सूख जाती हैं और बाली के नीचे का भाग सुनहरा हो जाता है। दानों को अगर अंगूठे से दबाया जाए तो दूध नहीं निकलता और दानों में कड़ापन आ जाता है। गेहूं की फसल में जब ये अवस्थाएं आ जाएं, तभी किसान भाई गेहूं की कटाई करें।

जाने गेहूं की कटाई कैसे करें?

संस्थान के निदेशक ने बताया के जब आप गेहूं की कटाई करें तो यह अवश्य ध्यान रखें के हाथ से कटी हुई गेहूं की फसल के बने हुए बोझ बिजली की तारों या ट्रांसफार्मर के नजदीक बिल्कुल भी ना रखें क्योंकि अक्सर बिजली की तारों या ट्रांसफार्मर से आज की चिंगारियां निकलती रहती हैं जिससे बड़ा हादसा होने का खतरा बना रहता है, बीड़ी पीने वाले लोग पक्की हुई फसल के आसपास बिल्कुल भी धूम्रपान न करें,, कटाई करते समय अपने आसपास आग बुझाने के संसाधनों का इंतजाम भी जरूर कर रखें जैसे रेत मिट्टी पानी को एकत्रित करके अपने आसपास जरूर रखें क्योंकि अगर कोई आंख की चिंगारी किसी तरफ से आ भी गई तो समय रहते इन सब चीजों से जल्दी ही आग पर काबू पाया जा सकता है क्योंकि आजकल के समय में सबसे ज्यादा समस्या इसी को लेकर आती है।

अनाज की हानि को कम करने के लिए, फसल पैरामीटरों और मशीन पैरामीटरों का संतुलन ध्यान में रखना चाहिए. इससे अनाज की हानि को कम किया जा सकता है. आज कल ज्यादातर किसान गेहूं की कटाई हार्वेस्टर मशीन यानी कंबाइन से करवाते हैं. लेकिन ज्यादा समय से काम में न लेने के कारण ये मशीनें कई बार दिक्कत करने लगती हैं. इसलिए, कटाई से पहले इनकी जांच ठीक तरह से करने के बाद ही कंबाइन का इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

भंडारण के समय ये खास बातें ध्यान रखें:

निदेशक ने बताया कि कटाई के बाद अगर किसान भाई गेहूं का भंडारण करना चाहते हैं तो सबसे जरूरी है कि गेहूं में नमी की मात्रा का ध्यान रखना क्योंकि इससे गेहूं में कीड़ा या फफूंद लग सकती है। गेहूं के दानों को साफ किया जाना चाहिए। अनाज को तब तक सुखाना चाहिए जब तक नमी की मात्रा 10 से 12 फीसदी से कम ना हो जाए। गेहूं के दानों में नमी का प्रतिशत 10-12 प्रतिशत होना चाहिए। स्टोरेज में रखने से पहले अनाज, भंडारण संरचना की सफाई और कीटाणुशोधन किया जाना चाहिए। स्टोरेज को बंद करने से पहले, कीटनाशकों का प्रयोग किया जाना चाहिए। चूहों को रोकने के लिए, आसपास का क्षेत्र को साफ किया जाना चाहिए।

कटाई का काम पूरा होने बाद खेतों की उर्वरता शक्ति कैसे बरकरार रहे:

निदेशक ने बताया कि कटाई के बाद किसान भाई फसल अवशेषों की अगर तूड़ी बना लेते है तो अच्छी बात है नही तो अवशेषों को छोटा कर खेतो की मिट्टी में ही इसे मिला दीजिये जिससे खेतो की उर्वरता शक्ति को और ज्यादा बढ़ने में मदद मिलेगी। किसान भाई फसल अवशेषों को बिल्कुल भी ना जलाएं क्योंकि जलाने से एक तो वातावरण में प्रदूषण बढ़ता है दूसरा इससे खेत मे अच्छे जीवाणुओं को भी दिक्कत आती है जिससे खेत की उर्वरता शक्ति कम हो जाती है।

Ekta TSN

rahulkash03@gmail.com http://www.thesummernews.in

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