लुधियाना | पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान एक बार फिर चुनावी मैदान में सतह पर आ गई है। लुधियाना वेस्ट विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार और पूर्व कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशू के प्रचार अभियान में पार्टी के शीर्ष नेता अब तक दूरी बनाए हुए हैं। आशू के प्रचार के लिए शहर में लगाए गए होर्डिंग्स में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर राजा वड़िंग, कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा और जिला कांग्रेस अध्यक्ष संजय तलवार की गैरमौजूदगी इस टकराव की स्पष्ट तस्वीर पेश करती है।
सूत्रों के अनुसार, भले ही पार्टी ने आशू को टिकट दिया हो और वे सक्रिय रूप से चुनाव प्रचार में लगे हों, लेकिन प्रदेश नेतृत्व अब तक उनकी मुहिम में शामिल नहीं हुआ है। यहां तक कि अब तक कोई साझा मंच भी देखने को नहीं मिला जहां यह नेता एक साथ नजर आए हों। हालांकि, टिकट की घोषणा के बाद वड़िंग और तलवार ने आशू के निवास पर पहुंचकर उन्हें बधाई देने की कोशिश की थी, लेकिन आशू की अनुपस्थिति के कारण यह मुलाकात संभव नहीं हो सकी।
इस घटनाक्रम को लगभग एक महीना बीत चुका है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच तनाव अभी तक कम नहीं हुआ है। पार्टी हाईकमान भी इस गुटबाजी को सुलझाने में असफल रहा है। माना जा रहा है कि इस अंदरूनी कलह का असर 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों तक देखने को मिल सकता है।
गौरतलब है कि प्रदेश कांग्रेस अब दो स्पष्ट गुटों में बंटी हुई नजर आ रही है—एक पक्ष की अगुवाई अमरिंदर राजा वड़िंग और प्रताप सिंह बाजवा कर रहे हैं, जबकि दूसरा गुट पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व में सक्रिय है। लुधियाना वेस्ट की चुनावी स्थिति इस बात का संकेत दे रही है कि कांग्रेस को पहले अपने घर को व्यवस्थित करना होगा, तभी वह सशक्त विपक्ष या सत्ता में वापसी का दावा कर सकेगी।
