शिमला, संजू -: हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (HRTC) के चालक-परिचालक यूनियन ने एक बार फिर सरकार और प्रबंधन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। मांगों पर सहमति न बनने के बाद यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि पहली तारीख को वेतन नहीं आया, तो 2 तारीख से पूरे प्रदेश में बसों के पहिये जाम कर दिए जाएंगे।आज शनिवार को प्रबंधन के साथ यूनियन की वार्ता भी विफल रही।
चालक परिचालक यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष मानसिंह ठाकुर ने आज पत्रकार वार्ता के दौरान चेतावनी देते हुए कहा कि वेतन नही तो काम नही, उन्होंने कहा कि आज प्रबंधन के साथ हुई बैठक पूरी तरह विफल रही है, जिसके बाद कर्मचारियों को आंदोलन की राह पकड़ने पर मजबूर होना पड़ रहा है।मानसिंह ठाकुर ने बताया कि यूनियन ने बीती 13 तारीख को ही सरकार और निगम प्रबंधन को नोटिस थमा दिया था। उन्होंने साफ किया कि अगर पहली तारीख को कर्मचारियों की सैलरी आ जाती है तो ठीक है, अन्यथा 2 तारीख से पूरे हिमाचल प्रदेश में चक्का जाम कर दिया जाएगा। हम सभी कर्मचारियों से अपील करते हैं कि वे काम बंद कर दें।”इसके साथ ही उन्होंने HRTC प्रशासन को आगाह करते हुए कहा कि अगर पहली तारीख को सैलरी नहीं आती है, तो प्रबंधन एडवांस टिकटों की बुकिंग न करे। यदि इसके बाद भी बुकिंग की जाती है और 2 तारीख को जनता को परेशानी होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी निगम प्रशासन की होगी।
अध्यक्ष ने कहा कि आज प्रबंधन को एक और नोटिस सौंपकर 24 तारीख तक निम्नलिखित लंबित देयताओं को चुकता करने का अल्टीमेटम दिया गया है।कर्मचारियों का पिछले लंबे समय का करीब 150 करोड़ रुपये का नाइट ओवरटाइम और करोड़ों का एरियर फंसा हुआ है।
कर्मचारियों के मेडिकल रीइंबर्समेंट के करीब 20 करोड़ रुपये आज तक जारी नहीं किए गए हैं।उन्होंने कहा कि प्रदेश के अन्य सरकारी कर्मचारियों को ₹50,000 की एरियर किस्त मिल चुकी है, लेकिन HRTC कर्मियों को इससे महरूम रखा गया है।यूनियन ने दो टूक कहा है कि कर्मचारी 24 तारीख तक गाड़ियां चलाएंगे, लेकिन यदि इस अवधि के भीतर ओवरटाइम, मेडिकल बिल और एरियर की अदायगी नहीं हुई, तो उसके बाद फिर से कड़ा कदम उठाया जाएगा।उन्होंने कहा कि कुछ छोटी मांगों पर बनी सहमति, लेकिन वित्तीय मामलों पर प्रबंधन ने हाथ खड़े कर दिए हैं।
मानसिंह ठाकुर ने कुछ राहत देने वाले फैसलों के लिए प्रबंधन का धन्यवाद भी किया। उन्होंने बताया कि प्रबंधन ने यूनियन की कुछ छोटी और प्रशासनिक मांगें मान ली हैं, जिनमें शामिल हैं:चालकों द्वारा ‘परना’ इस्तेमाल न करने के आदेश को वापस ले लिया गया है।कर्मचारियों की प्रमोशन (पदोन्नति) और नई भर्ती की मांग को स्वीकार किया गया है।रिकवरी से जुड़ी मांगों पर भी सहमति बनी है।लेकिन, जैसे ही बात करोड़ों रुपये के लंबित वित्तीय बकायों पर आई, तो प्रबंधन ने बजट का हवाला देते हुए अपने हाथ खड़े कर दिए।यूनियन अध्यक्ष ने दुख और रोष जताते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में सभी विभागों के कर्मचारियों को समय पर वेतन और भत्ते मिल जाते हैं, लेकिन हिमाचल की लाइफलाइन कहे जाने वाले HRTC के कर्मियों को हमेशा अपने वेतन के लिए तरसना पड़ता है। उन्होंने सरकार और निगम प्रबंधन से गुहार लगाई है कि स्थिति की गंभीरता को समझा जाए और समय रहते मांगें पूरी की जाएं, ताकि प्रदेश की जनता को परेशानी न उठानी पड़े।
