धर्मशाला,राहुल-:हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन एवं ट्रैकिंग स्थल त्रियुंड ट्रैक पर आने वाले पर्यटकों और ट्रेकर्स को जल्द बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। वन विभाग ने ट्रैक पर सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और आवश्यक बुनियादी सुविधाएं विकसित करने की योजना तैयार की है।इसके तहत लगभग ₹30 लाख की लागत से विभिन्न विकास कार्य किए जाएंगे,जबकि पेयजल सुविधा को भी बेहतर बनाया जाएगा।
धर्मशाला वन मंडल के डीएफओ अमित शर्मा ने बताया कि त्रियुंड धौलाधार लैंडस्केप का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता तथा इको-टूरिज्म गतिविधियों के लिए देश-विदेश के पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है। उन्होंने कहा कि यह एक संरक्षित वन क्षेत्र है,इसलिए यहां किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए सीमित स्तर पर ही किया जाएगा,ताकि क्षेत्र की प्राकृतिक पहचान और जैव विविधता सुरक्षित रह सके।उन्होंने बताया कि त्रियुंड ट्रैक एक एडवेंचर गतिविधि है,इसलिए केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ और सक्षम लोगों को ही इस ट्रैक पर जाना चाहिए।पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए वन विभाग ने ट्रैक पर वायरलेस संचार प्रणाली शुरू कर दी है,जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत संपर्क स्थापित किया जा सके। इसके अलावा त्रियुंड और करेरी में पांच-पांच स्ट्रेचर उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि दुर्घटना या स्वास्थ्य संबंधी समस्या की स्थिति में घायल ट्रेकर्स का शीघ्र रेस्क्यू किया जा सके।
वन विभाग के अनुसार इस वर्ष ट्रैक पर गज़ीबो,रेन शेल्टर और आकर्षक प्रवेश द्वार जैसी सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा। साथ ही लाका से त्रियुंड तक पेयजल पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना भी तैयार की गई है।इस परियोजना के लिए ₹15 लाख का ऋण स्टेट इको-टूरिज्म सोसायटी से प्राप्त हो चुका है,जबकि शेष धनराशि के लिए जिला प्रशासन से सहयोग का आश्वासन मिला है। विभाग का कहना है कि मानसून समाप्त होने के बाद विकास कार्यों को गति दी जाएगी, जिससे आने वाले पर्यटन सीजन में ट्रैक पर पहुंचने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
