शिमला-:हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी सेवाओं में भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रशासनिक सचिवों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में निर्देश दिए कि भविष्य में सरकारी सेवा में नियुक्ति से पहले सभी अभ्यर्थियों का डोप टेस्ट अनिवार्य किया जाए। इसके लिए संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश तैयार करने के आदेश भी दिए गए हैं।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने नशे के खिलाफ राज्य सरकार के अभियान की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश में चिट्टा और अन्य मादक पदार्थों के कारोबार पर सख्ती से कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने विभागों से यह जानकारी भी मांगी कि चिट्टा तस्करी में संलिप्त पाए गए सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि युवाओं को नशे से बचाना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
मुख्यमंत्री ने चतुर्थ श्रेणी के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लंबित ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण के भुगतान को शीघ्र जारी करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि बजट घोषणाओं के अनुरूप इन मामलों का जल्द निपटारा सुनिश्चित किया जाए ताकि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राहत मिल सके।इसके अलावा, करुणामूलक आधार पर नौकरी की मांग करने वाले आवेदकों का विस्तृत रिकॉर्ड उपलब्ध करवाने के निर्देश भी विभागाध्यक्षों को दिए गए। सरकार इन मामलों पर समुचित निर्णय लेने के लिए सभी लंबित प्रकरणों की समीक्षा करेगी।राज्य में विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े पदों की जानकारी एकत्र करने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन्हें जल्द भरा जाएगा। उन्होंने बताया कि सरकार ने जूनियर ऑफिस असिस्टेंट के 500 पदों पर भर्ती करने का फैसला लिया है।
हाल ही में आए तूफान से वन क्षेत्रों में गिरे और उखड़े पेड़ों के संबंध में भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि 1 जून से विशेष अभियान चलाकर इन पेड़ों को हटाया जाएगा ताकि वन संपदा के नुकसान को रोका जा सके और संसाधनों का समय पर उपयोग सुनिश्चित हो।बैठक में मुख्य सचिव संजय गुप्ता सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
