पलवल,सुन्दर,कुंडू-:पलवल के गांव रजोलका निवासी 96 वर्षीय अंतरराष्ट्रीय बीन वादक हवा सिंह नाथ को प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार-2024 से सम्मानित किया गया है। दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने भी उन्हें बधाई दी है। हवा सिंह नाथ को इससे पहले भी राज्य स्तर पर कई सम्मान मिल चुके हैं।हवा सिंह नाथ का जन्म घुमंतू आदिवासी समुदाय के एक गरीब सपेरा परिवार में हुआ। उनके परिवार की आजीविका बीन बजाने की लोककला से चलती थी। बचपन से ही उन्होंने परिवार के सदस्यों से बीन बजाना सीखा और धीरे-धीरे इस कला में ऐसी महारत हासिल की कि उनकी पहचान दूर-दूर तक बन गई। गांव और आसपास के क्षेत्रों में लोग उनकी बीन की धुन सुनने के लिए घंटों बैठते थे। क्षेत्र में होने वाले त्योहारों और अन्य आयोजनों में भी उन्हें विशेष रूप से बीन बजाने के लिए बुलाया जाने लगा।
बढ़ती लोकप्रियता के बाद हवा सिंह नाथ ने आकाशवाणी रोहतक पर भी बीन की प्रस्तुति दी।वर्ष 1986 में दिल्ली में आयोजित अपना उत्सव कार्यक्रम में उन्होंने देशभर से पहुंचे लोक कलाकारों के साथ हिस्सा लिया। इसके बाद मुंबई और दुबई शॉपिंग फेस्टिवल जैसे बड़े मंचों पर भी अपनी कला का प्रदर्शन किया।उन्होंने गणतंत्र दिवस समारोह,सूरजकुंड हस्तशिल्प मेला समेत देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित कार्यक्रमों में बीन वादन की प्रस्तुति देकर सपेरा समुदाय की पारंपरिक लोककला को पहचान दिलाई।हवा सिंह नाथ का कहना है कि 96 वर्ष की उम्र में भी वह अपनी कला के प्रति पूरी तरह सक्रिय हैं और आज भी कई घंटों तक बीन बजा सकते हैं।उनका प्रयास रहा है कि यह पारंपरिक कला आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचे और विलुप्त न हो।उन्होंने अपने बच्चों को भी बीन बजाने की कला सिखाई। राष्ट्रपति से मिले सम्मान को उन्होंने अपने जीवन की बड़ी उपलब्धि बताते हुए खुशी जताई।हालांकि परिवार की अगली पीढ़ी इस कला को पेशे के तौर पर आगे बढ़ाने से दूरी बना रही है।गांव रजोलका में हवा सिंह नाथ का बड़ा परिवार है। उनके पांच बेटे उनके साथ रहते हैं। उनके 10 पोते और तीन पोतियां हैं।परिवार के अनुसार, बच्चों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक है।बीन बजाने की कला से परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल है,इसलिए बेटे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने पर जोर दे रहे हैं। उनके कई पोते नौकरी भी कर रहे हैं।ऐसे में राष्ट्रपति से मिला सम्मान न केवल हवा सिंह नाथ की व्यक्तिगत उपलब्धि है,बल्कि सपेरा समुदाय की उस लोककला की भी पहचान है,जिसे उन्होंने पूरी जिंदगी साधना और समर्पण के साथ जीवित रखा।
