करनाल (एकता): ‘अंतरिक्ष परी’ के नाम से मशहूर कल्पना चावला को आज भी कोई नहीं भूला। कुछ लोग चले जाने के बाद भी मुद्दतों याद किए जाते हैं। नासा की अंतरिक्ष वैज्ञानिक रहीं कल्पना का नाम भी ऐसे ही लोगों में शुमार है। हाल ही में एक बड़ी खबर सामने आई है कि कल्पना चावला के पिता और वरिष्ठ समाज सेवी बनारसी दास चावला ने 94 साल की उम्र में ही दुनिया को अलविदा कर दिया। सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को उनका नि+धन हुआ। बता दें कि आज उनके पार्थिव श@रीर करनाल मेडिकल कॉलेज को दान किया जाएगा, ताकि मेडिकल स्टूडेंट इस पर रिसर्च कर सकें। लगभग 1:30 बजे उनके पार्थिव श#रीर को निर्मल कुटिया लाया जाएगा, जहां से फॉर मेडिकल कॉलेज को सौंपा जाएगा।

जानकारी के मुताबिक उनके पिता ने अपना सारा जीवन सामाजिक कार्यों में लगा दिया। मरणो+परांत भी उन्होंने अपनी देह को मेडिकल छात्रों के शोध के लिए दान कर दिया। कल्पना के पिता का व्यक्तित्व इतना महान था कि उनके प्रति श्रद्धा से सिर अपने आप झुकता है। उन्होंने समाज की बेहतरी के लिए काम किए और आज दुनिया से चले जाने के बाद भी वो समाज के काम आ रहे हैं। खास बात यह है कि छात्रों को मोटीवेट करना, गरीब बेटियों को कंप्यूटर व अन्य कोर्स फ्री करवाने और फ्री शिक्षा देने जैसे कई काम हैं, जो उनके साथ जुड़े हैं। हालांकि वो किसी फंक्शन में बुके व मेमेंटो नहीं लेते थे।

कल्पना चावला हरियाणा के करनाल कस्बे में पली-बढ़ी थीं। उनका जन्म 17 मार्च 1962 को हुआ। वह अंतरिक्ष में कदम रखने वाली पहली भारतीय महिला थी। कल्पना चावला ने अपनी पढ़ाई अमेरिका से की। उनके पिता ने शिक्षा से लेकर उसे शोध के लिए वहां भेजा। उन्होंने कल्पना चावला का पूरा सहयोग किया जिसकी बदौलत कल्पना भारतीय मूल की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री बन पाई। कल्पना चावला ने साल 1988 में नासा के लिए काम करना शुरू कर दिया था। दिसंबर 1994 में स्पेस मिशन के लिए उनका चयन अंतरिक्ष-यात्री यानी एस्ट्रोनॉट के रूप में कर लिया गया। वह एक नहीं बल्कि दो बार अंतरिक्ष में गई। उन्होंने पहली बार 19 नवंबर 1997 को अंतरिक्ष यात्रा के लिए उड़ान भरी थी। 16 जनवरी 2003 को उन्होंने दूसरी बार अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी थी। कल्पना चावला ने फ्रांस के जान पियर से शादी की जो एक फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर थे।

