दिल्ली ,13 मार्च -: हिमाचल प्रदेश में चल रही विभिन्न रेल परियोजनाओं की प्रगति को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यसभा में विस्तृत जानकारी दी है। भाजपा सांसद हर्ष महाजन द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रदेश में कई महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं पर काम जारी है और इन पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
रेल मंत्री ने बताया कि अंब-अंदौरा रेलवे लाइन मौजूदा मोरिंडा–रूपनगर–आनंदपुर साहिब–दौलतपुर चौक मार्ग का हिस्सा है और इसे मुकेरियां तथा जालंधर–जम्मू रेल मार्ग से जोड़ने के लिए विस्तार किया जा रहा है। नंगल डैम से दौलतपुर चौक तक 60 किलोमीटर रेल लाइन का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि दौलतपुर चौक से मुकेरियां (42 किमी) खंड में निर्माण कार्य प्रगति पर है।दौलतपुर चौक–करटोली (10.5 किमी) खंड का काम पूरा हो चुका है, जबकि करटोली–तलवाड़ा (13.65 किमी) खंड में वायाडक्ट, पुलों और आरओबी-आरयूबी के निर्माण का लगभग 25 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया है। तलवाड़ा–मुकेरियां (28.70 किमी) खंड में 13 बड़े पुलों का निर्माण जारी है और करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।केंद्रीय मंत्री ने बताया कि चंडीगढ़–बद्दी नई रेल लाइन (33 किमी) परियोजना को 1540 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई है, जिसमें केंद्र और हिमाचल सरकार की लागत साझेदारी 50–50 प्रतिशत है। इस परियोजना पर अब तक करीब 1069 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण और वन स्वीकृति पूरी हो चुकी है तथा वायाडक्ट, पुलों और स्टेशन भवनों का निर्माण कार्य जारी है।
इसी तरह भानुपल्ली–बिलासपुर–बेरी नई रेल लाइन (63 किमी) परियोजना की अनुमानित लागत 6753 करोड़ रुपये है, जिसमें 75 प्रतिशत खर्च केंद्र और 25 प्रतिशत राज्य सरकार वहन कर रही है। इस परियोजना के तहत 16 सुरंगों में से 15 का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि कई बड़े पुल, आरओबी और स्टेशन भवनों का निर्माण भी तेजी से जारी है।
रेल मंत्री ने बताया कि बिलासपुर–मनाली–लेह रेल लाइन (489 किमी) को रक्षा मंत्रालय ने रणनीतिक परियोजना के रूप में चिन्हित किया है। इसका सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 1.31 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें लगभग 270 किलोमीटर लंबी सुरंगें प्रस्तावित हैं।
इसके अलावा पठानकोट–जोगिंदरनगर नैरोगेज रेल लाइन को ब्रॉडगेज में बदलने के लिए सर्वेक्षण को मंजूरी दी गई है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया जारी है।रेल मंत्रालय के अनुसार हिमाचल प्रदेश में रेलवे अवसंरचना के लिए बजट आवंटन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2009 से 2014 के बीच जहां औसतन 108 करोड़ रुपये प्रति वर्ष आवंटित किए जाते थे, वहीं 2025–26 में यह बढ़कर 2716 करोड़ रुपये हो गया है।सांसद हर्ष महाजन ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से हिमाचल में पर्यटन, व्यापार और सामरिक दृष्टि से बड़े लाभ मिलेंगे और प्रदेश के विकास को नई गति मिलेगी।
