जम्मू (एकता): श्रद्धालुओं के मन में माता वैष्णो देवी मंदिर को लेकर अलग ही आस्था रहती है। मंदिर तक की यात्रा को देश के सबसे पवित्र और कठिन तीर्थ यात्राओं में से एक माना जाता है। नए साल पर मां वैष्णो देवी के दरबार में पहले ही दिन 45 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। बता दें कि साल 2024 के पहले दिन भी श्रद्धालुओं ने आर.एफ.आई.डी. हासिल कर मां भगवती के दरबार की ओर प्रस्थान किया।

जानकारी के मुताबिक रात 10 से 25 मिनट पहले ही यात्रा पंजीकरण कक्ष बंद कर दिया गया। यात्रा में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं को दर्शन करवाने के लिए स्पेशल टीमें तैनात की गई हैं। श्रद्धालुओं ने हेलीकॉप्टर सेवा, बैटरी कार सेवा का भी लाभ लिया। सोमवार सुबह 4 बजे से ही कटड़ा में यात्रा पंजीकरण कक्ष पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं।

माता वैष्णो देवी मंदिर में ये चीज़ें हैं खास
वैष्णो माता का मंदिर गुफा में स्थित है। बता दें कि त्रिकुटा की पहाड़ी पर स्थित इस गुफा में जिस जगह माता निवास करती थीं उस गुफा की लंबाई करीब 98 मीटर है। जिस पर एक साथ तीन मुर्तियां बनी हुई हैं।
अर्द्धकुमारी और भैरवनाथ मंदिर को लेकर जानिए क्या है मान्यता
खास बात यह है कि वैष्णो देवी मंदिर जाने वाले श्रद्धालु अर्द्धकुमारी से होकर जाते हैं, जो कि मंदिर और कटरा के करीब बीच में ही है। मान्यता है कि माता वैष्णो देवी ने भागते-भागते इसी जगह से भैरव को मुड़कर देखा था। जिसके बाद पीछा कर रहे भैरव को उन्होंने जब वापस जाने के लिए कहा तो वह नहीं माना। फिर माता ने उसका स#र ध+ड़ से अलग कर दिया, जो माता की गुफा से तीन किमी ऊपर के ओर जाकर गिरा, जहां अब भैरवनाथ बाबा का मंदिर स्थित है।
