तरनतारन | अमृतसर-बठिंडा नेशनल हाईवे-54 पर स्थित उस्मा गांव के टोल प्लाजा पर अब स्थानीय लोगों और किसान संघर्ष समिति के सदस्यों को मुफ्त सुविधा नहीं मिलेगी। टोल प्लाजा संचालक कंपनी ने 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों के लिए निशुल्क टोल की सुविधा बंद कर दी है। इससे स्थानीय वाहन चालकों में नाराजगी है और सोमवार सुबह से ही टोल प्लाजा पर हंगामे की स्थिति बनी रही।
नए नियमों के तहत अब इस क्षेत्र के लोगों को या तो प्रति वाहन 350 रुपये का मासिक पास बनवाना होगा या फिर हर बार टोल शुल्क चुकाना पड़ेगा। टोल शुल्क नकद भुगतान पर 330 रुपये और फास्टैग से 250 रुपये प्रति वाहन तय किया गया है। इस अचानक हुए बदलाव से लोगों को भारी असुविधा हुई। किसान संघर्ष समिति के सदस्य जब टोल पर पहुंचे तो उन्हें रोक दिया गया, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
सूत्रों के अनुसार, कई वाहन चालक टोल कर्मचारियों से उलझते और जबरन बैरिकेड्स पार करते नजर आए। इस टोल प्लाजा से प्रतिदिन करीब 9 से 10 हजार वाहन गुजरते हैं, जबकि सप्ताहांत पर संख्या 12 हजार तक पहुंच जाती है।
गौरतलब है कि पहले इस टोल का संचालन पाथ इंडिया कंपनी करती थी, जिसका अनुबंध 6 जून 2025 को समाप्त हो गया। इसके बाद जिम्मेदारी ऋद्धि सिद्धि कंपनी को सौंपी गई, जिसने आते ही मुफ्त सुविधा बंद कर दी। कंपनी के मैनेजर सतेंद्र कुमार ने बताया कि भारत सरकार की नीति के तहत अब 20 किमी के दायरे में रहने वालों को भी टोल देना अनिवार्य है। हालांकि, पीले कार्डधारी पत्रकारों को पूर्व की भांति निशुल्क सुविधा जारी रहेगी।
उन्होंने बताया कि 350 रुपये मासिक पास की सुविधा सफेद नंबर प्लेट वाले वाहनों के लिए उपलब्ध है और वाहन चालकों से अपील की है कि वे दो दिन के भीतर पास बनवाकर अव्यवस्था से बचें। मंगलवार को किसान संघर्ष समिति और टोल प्रबंधन के बीच इस मुद्दे पर विशेष बैठक भी प्रस्तावित है।
