करनाल-:करनाल पहुंचे किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था और केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि देश की जनता अब पारंपरिक राजनीतिक दलों से निराश हो चुकी है और नए राजनीतिक विकल्प की तलाश कर रही है। उन्होंने “कॉकरोच जनता पार्टी” नाम से चल रही ऑनलाइन मुहिम का समर्थन करते हुए कहा कि यह जनता के बदलाव की भावना को दर्शाती है।
चढूनी ने कहा कि आज राजनीति सेवा नहीं बल्कि कारोबार बन चुकी है, जहां सत्ता और पैसा एक-दूसरे के पूरक बन गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी लगातार बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक दबाव से जूझ रहा है, जबकि बड़े उद्योगपतियों को राहत दी जा रही है।
कंप्यूटर शिक्षकों का मुद्दा उठाया
उन्होंने कंप्यूटर शिक्षकों की समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि कई शिक्षक पिछले 15 वर्षों से बेहद कम वेतन पर काम कर रहे हैं। चढूनी ने कहा कि लंबे समय तक ड्यूटी करने के बावजूद शिक्षकों को उचित मेहनताना नहीं मिल रहा, जो शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर जताई चिंता
स्वास्थ्य व्यवस्था पर बोलते हुए किसान नेता ने कहा कि इलाज आम आदमी की पहुंच से दूर होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि गंभीर बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार आर्थिक रूप से टूट जाते हैं। उनका कहना था कि स्वास्थ्य सुविधाओं की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि लोगों की आय में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं हो रही।
नई राजनीतिक मुहिम को बताया जनता की आवाज
चढूनी ने कहा कि वह “कॉकरोच जनता पार्टी” की मुहिम के समर्थन में हैं और उन्हें इसका राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया है। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर हुई ऑनलाइन वोटिंग में उन्हें व्यापक समर्थन मिला। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी तक पार्टी का आधिकारिक पंजीकरण नहीं हुआ है और फिलहाल यह अभियान जनमत जानने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।
पूंजीपतियों को लेकर उठाए सवाल
उन्होंने कहा कि देश में करोड़ों लोग बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि बड़े उद्योगपतियों को आर्थिक राहत मिल रही है। चढूनी ने सवाल उठाया कि क्या आम जनता की समस्याएं सरकार की प्राथमिकता में हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर संगठन बनाने की वकालत
किसान नेता ने कहा कि यदि यह राजनीतिक अभियान आगे बढ़ता है तो इसे राष्ट्रीय स्तर पर संगठित किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनहित के लिए काम करने वाले लोगों को एक मंच पर लाकर मजबूत विकल्प तैयार किया जाए।
पाम ऑयल आयात पर जताई चिंता
पेट्रोल-डीजल और रसायनों के कम उपयोग को लेकर प्रधानमंत्री की अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए चढूनी ने कहा कि सरकार को भी देश का धन बचाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने विदेशों से आयात होने वाले पाम ऑयल पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे घरेलू तेल उत्पादन प्रभावित होता है। उन्होंने सरसों के तेल के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही।
