Delhi, 11 December-: राज्यसभा के शून्यकाल में आज हिमाचल प्रदेश से सांसद हर्ष महाजन ने राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों की मौजूदा स्थिति, लगातार बढ़ते भूस्खलन जोखिम और नाज़ुक हिमालयी पर्यावरण की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को मुखरता से उठाया।
सांसद महाजन ने अपने वक्तव्य की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश को अभूतपूर्व सहयोग प्रदान किया है। उन्होंने बताया कि राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास पर अब तक लगभग ₹30,000 करोड़ का निवेश किया जा चुका है, जो प्रदेश की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास के लिए ऐतिहासिक कदम है।उन्होंने कहा कि हिमाचल की पर्वतीय भू-आकृति और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए सड़क निर्माण में वैज्ञानिक मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक है। भारी मानसून और बढ़ते भूस्खलन ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्माण कार्यों में ढलानों की स्थिरता, जल निकासी प्रबंधन और पर्यावरणीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
महाजन ने कहा कि कई स्थानों पर बिना वैज्ञानिक विश्लेषण के की गई सीधी व गहरी कटिंग से ढलान अस्थिर हुए हैं, जिससे भूस्खलन की घटनाए बढ़ी हैं। उन्होंने परियोजनाओं की कमजोर या अधूरी DPR को भी बड़ी समस्या बताते हुए DPR तैयार करने वाली एजेंसियों की कठोर समीक्षा और उसमें भू-तकनीकी तथा पर्यावरणीय अध्ययनों को अनिवार्य बनाने की मांग की।सांसद ने NHAI के प्रशिक्षित अधिकारियों द्वारा साइट्स की नियमित मॉनिटरिंग की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि कुछ ठेकेदार निर्धारित मानकों का पालन नहीं करते और कई बार जल्दबाज़ी में वैज्ञानिक प्रक्रियाओं की अनदेखी करते हुए घाटियों में मलबा फेंकते हैं, जो गंभीर पर्यावरणीय उल्लंघन है। ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई अनिवार्य है।
