नई दिल्ली,9 फरवरी-:पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री एवं हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने आज लोकसभा में नियम 377 के तहत भारतीय बाजार में उपलब्ध शिशु आहार और सॉफ्ट ड्रिंक्स में अत्यधिक अतिरिक्त चीनी की मौजूदगी को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने इसे उभरती हुई सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बताते हुए सरकार से उपभोक्ताओं, विशेषकर बच्चों, की सुरक्षा के लिए सशक्त और प्रभावी फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग नियम लागू करने की मांग की।
अनुराग सिंह ठाकुर ने वैश्विक स्वास्थ्य मानकों का उल्लेख करते हुए बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) कुल दैनिक ऊर्जा सेवन में मुक्त शर्करा को 10 प्रतिशत से कम, और आदर्श रूप से 5 प्रतिशत से भी कम रखने की सिफारिश करता है, जबकि शिशु आहार में किसी भी प्रकार की अतिरिक्त चीनी के उपयोग की अनुशंसा नहीं की जाती। इसके विपरीत, अध्ययनों के अनुसार भारत में कुछ पैकेज्ड शिशु आहार उत्पादों में प्रति सर्विंग लगभग 2.7 ग्राम अतिरिक्त चीनी, जबकि कई लोकप्रिय सॉफ्ट ड्रिंक्स में प्रति 100 मिलीलीटर 10.6 ग्राम तक चीनी पाई जाती है। उन्होंने कहा कि इतनी अधिक चीनी का सेवन बचपन के मोटापे, कम उम्र में मधुमेह, दंत रोगों और अन्य गैर-संचारी रोगों को बढ़ावा देता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मोटापे के बढ़ते खतरे पर लगातार दी जा रही चेतावनियों का उल्लेख करते हुए ठाकुर ने 2025 के स्वतंत्रता दिवस संबोधन को याद किया, जिसमें प्रधानमंत्री जी ने मोटापे को “मूक संकट” बताया था। उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि प्रधानमंत्री जी ने हर परिवार से खाना पकाने के तेल की खपत में 10 प्रतिशत की कमी करने का आह्वान करते हुए कहा था कि इससे देश के समग्र स्वास्थ्य को बड़ा लाभ होगा। अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि तेल और हानिकारक वसा को कम करने का यह आह्वान अत्यंत सराहनीय है, लेकिन अत्यधिक चीनी के सेवन पर नियंत्रण भी उतना ही आवश्यक है, क्योंकि दोनों मिलकर मोटापा और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को बढ़ाते हैं। उन्होंने मन की बात और अन्य सार्वजनिक मंचों पर प्रधानमंत्री जी द्वारा स्वस्थ जीवनशैली को लेकर दिए गए संदेशों का भी उल्लेख किया, जिनमें छोटे-छोटे आहार परिवर्तनों से फिट और रोग-मुक्त भारत के निर्माण पर जोर दिया गया है। ठाकुर ने अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों और मीठे पेय पदार्थों की बढ़ती खपत पर चिंता जताते हुए कहा कि इस दिशा में मजबूत नियामक हस्तक्षेप की आवश्यकता है। उन्होंने ऐसी स्पष्ट, प्रमुख और सरल फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग प्रणाली लागू करने की मांग की जिसमें चित्रात्मक चेतावनी या स्टार-आधारित रेटिंग के माध्यम से चीनी, नमक और अस्वास्थ्यकर वसा की अधिक मात्रा को साफ-साफ दर्शाया जाए।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की लेबलिंग न केवल उपभोक्ताओं को सही जानकारी देकर बेहतर आहार विकल्प चुनने में सक्षम बनाएगी, बल्कि खाद्य उद्योग को अपने उत्पादों को अधिक स्वास्थ्य-अनुकूल बनाने के लिए भी प्रेरित करेगी। यह प्रयास प्रधानमंत्री मोदी जी के मोटापा-मुक्त भारत के विज़न के अनुरूप है।
अनुराग सिंह ठाकुर ने यह भी बताया कि कई देशों ने वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के तहत प्रभावी फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग को अपनाया है, जिससे जन-जागरूकता बढ़ी है और स्वस्थ उपभोग व्यवहार को प्रोत्साहन मिला है। भारत में इन अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाने से पारदर्शिता बढ़ेगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका और सशक्त होगी।उन्होंने कहा कि अतिरिक्त चीनी की निगरानी और प्रभावी लेबलिंग पर निर्णायक कदम बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा, भविष्य के स्वास्थ्य-व्यय को कम करने और एक स्वस्थ, सक्षम एवं उत्पादक भारत के निर्माण के लिए अनिवार्य हैं।
