Shimla, 23 January-:कोच्चि में आयोजित अंतर्देशीय जलमार्ग विकास परिषद (IWDC) की तीसरी बैठक में हिमाचल प्रदेश ने जल परिवहन के क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि हासिल की। इस उच्च स्तरीय बैठक में हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने की। खास बात यह रही कि बैठक का आयोजन क्रूज पोत “इंपीरियल क्लासिक” पर किया गया, जो भारत में अंतर्देशीय जल परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार की गंभीर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने परिषद को जानकारी दी कि हिमाचल प्रदेश और पंजाब में राष्ट्रीय जलमार्गों के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। उन्होंने बताया कि रावी नदी (राष्ट्रीय जलमार्ग-84) को रिवर क्रूज पर्यटन के लिए विकसित किया जा रहा है। रणजीत सागर बांध से चमेरा बांध तक प्रस्तावित इस परियोजना के तहत पहली जेटी जनवरी 2026 तक पूरी कर ली जाएगी।इसके अलावा सतलुज नदी (राष्ट्रीय जलमार्ग-98) को धार्मिक और पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। यह मार्ग हिमाचल प्रदेश के तत्तापानी और नैना देवी मंदिर को पंजाब के आनंदपुर साहिब और कीरतपुर साहिब से जोड़ेगा। फिलहाल इस परियोजना की व्यवहार्यता अध्ययन प्रक्रिया जारी है।
बैठक के दौरान भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) और हिमाचल प्रदेश सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह MoU राज्य में जल परिवहन अवसंरचना के योजनाबद्ध और सहयोगात्मक विकास के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा।परिषद को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश के अंतर्देशीय जलमार्ग नेटवर्क में एक प्रमुख भूमिका निभा सकता है, क्योंकि कई महत्वपूर्ण नदियों का उद्गम राज्य से होता है। उन्होंने केंद्र सरकार से तकनीकी और वित्तीय सहयोग बढ़ाने का आग्रह किया और विशेष रूप से हाइड्रो-इलेक्ट्रिक कैटामारन जैसे पर्यावरण-अनुकूल जहाजों को शामिल करने की मांग की, जो पहाड़ी राज्यों के लिए उपयुक्त हैं।
उपमुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि हिमाचल प्रदेश सरकार जल परिवहन और पर्यटन के सतत विकास के लिए भारत सरकार और IWAI के साथ मिलकर काम करती रहेगी। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी से न केवल पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
