शिमला, संजू -:हिमाचल प्रदेश को कविंदर गुप्ता के रूप में अपना नया राज्यपाल मिल गया है। शिमला के लोकभवन में आयोजित गरिमामय समारोह में कविंदर गुप्ता ने प्रदेश के 30वें राज्यपाल के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। उन्हें हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावलिया ने शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत राष्ट्रीय गीत के सभी छह छंदों के गायन से हुई, जिसके बाद राज्यपाल ने विधिवत शपथ ली।
इस मौके पर हरियाणा के राज्यपाल प्रोफेसर आशिम कुमार घोष अपनी धर्मपत्नी मित्रा घोष के साथ मौजूद रहे। वहीं मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर समेत प्रदेश सरकार के कई मंत्री, विधायक और गणमान्य लोग भी समारोह में शामिल हुए।शपथ लेने के बाद राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने शिमला में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों से उनका गहरा जुड़ाव रहा है। उन्होंने बताया कि लद्दाख में काम करते हुए उन्हें वहां के विकास कार्यों को करीब से देखने और समझने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि धारा 370 हटने और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद वहां विकास की गति काफी तेज हुई है। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने लद्दाख में 10 हजार किलोमीटर से अधिक का दौरा किया और क्षेत्र की समस्याओं और संभावनाओं को नजदीक से जाना।
कविंदर गुप्ता ने कहा कि अब उन्हें हिमाचल प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिला है और यह उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि हिमाचल एक खूबसूरत पहाड़ी राज्य है, जहां पर्यटन, आतिथ्य और धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इन संभावनाओं को बेहतर तरीके से विकसित करने की जरूरत है ताकि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को और मजबूत किया जा सके। उन्होंने बताया कि इस विषय पर उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी चर्चा हो चुकी है।राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में कौशल विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता है ताकि युवाओं को बेहतर अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि आने वाले तीन से चार महीनों के भीतर वह हिमाचल प्रदेश के सभी 12 जिलों का दौरा करेंगे और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि देश की करीब 65 प्रतिशत आबादी युवा है और युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं बल्कि रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में काम करना होगा।
राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल के विकास के लिए सरकार और विपक्ष दोनों को मिलकर काम करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि पूर्व राज्यपाल आचार्य देवव्रत, राजेंद्र आर्लेकर और शिव प्रताप शुक्ल द्वारा शुरू किए गए जनहित के कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। बतौर राज्यपाल और प्रदेश के विश्वविद्यालयों के चांसलर के रूप में शिक्षा व्यवस्था और विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता पर भी उनकी विशेष प्राथमिकता रहेगी।कविंदर गुप्ता ने नशे की बढ़ती समस्या पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नशा समाज के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है और इसे खत्म करने के लिए केवल सरकार के प्रयास ही पर्याप्त नहीं हैं। समाज के हर वर्ग को इसमें अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
