प्रकृति प्रेम ने छुड़वा दी इंजनीयरिंग की नौकरी…खुद का स्टार्टअप कर बन गए खुशबुओं के सौदागर

मंडी, धर्मवीर ( TSN)– बचपन से प्रकृति व विभिन्न प्राकृतिक चीजों की खुशबुओं से मंत्रमुग्ध होने वाले इंजीनियर युवक का नौकरी से ऐसा मन उठा कि अपनी अच्छी खासी नौकरी को लात मारकर, हिमाचल अपने घर लौट आया। प्रकृति की महकों ने इस युवक को अपनी ओर ऐसे आकर्षित किया कि खुशबू बांटने को ही इस युवक ने अपना पेशा बना लिया और आज खुशबुओं का सौदागर बन गया है। जीं हां यहा बात हो रही है कांगड़ा जिला के पालमपुर के रहने वाले राजन मिन्हास की। आज राजन मिन्हास अरोमा थेरेपी के प्राकृतिक प्रोडक्ट बेचकर न केवल सफल उद्यमी बनें हैं, बल्कि इन्होंने अपने क्षेत्र की महिलाओं के लिए भी रोजगार के दरवाजे खोले हैं।
सीएम स्टार्टअप योजना के तहत  शुरू किया था अरोमा थेरेपी प्रोडक्ट बनाने का काम 
 राजन मिन्हास ने 4 साल पहले कांकशी नाम से अरोमा थेरेपी प्राकृतिक उत्पाद बनाना आरंभ किया और आज वे अपने इस स्टार्ट को लाखों में ले जा चुके हैं। अरोमा थेरेपी के यह उत्पाद इस बार मंडी शहर के गांधी शिल्प बाजार बिक्री एवं प्रदर्शनी में भी पहुंचे है। राजन मिन्सान बतातें हैं कि प्रकृति प्रेम के चलते साल 2018 में उन्होंने साउथ इंडिया में पहले उन्होंने अच्छी खासी इनकम की इंजनीयरिंग की नौकरी छौड़ी।जिसके बाद वे घर आ गए और प्रकृति से संबधित अलग-अलग व्यावसायिक आइडिया पर काम करने लगे। साल 2020 में सीएम स्टाटअप योजना के तहत उन्होंने हिमाचल जैव संसाधन प्रौद्योगिकी संस्थान यानी सीएसआईआर के सहयोग से प्राकृतिक वैक्स से अरोमा थैरेपी उत्पाद बनना शुरू किए।
10 महिलाओं को भी दे रहे रोजगार
राजन मिन्हास ने बताया कि शत प्रतिशत प्राकृतिक वैक्स से वह इन प्रोडक्ट को बना रहें हैं, जिनमें अरोमा कैंडल, विभिन्न प्रकार के इत्र, रोज वाटर, मसाज कैंडल इत्यादि शामिल हैं। जो व्यक्ति को रिफ्रेश, एनर्जेटिक महसूस कराने के साथ भावनात्मक व मानसिक तनाव को दूर करने में मदद करते है। इन प्रोडक्ट को बनाने के लिए पालमपुर से ही अपना स्टार्टअप शुरू किया है। प्रोडक्ट बनाने में उनके साथ शैलजा स्वयं सहायता समूह की 10 महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो हर महीने 6-8 हजार रुपये घरद्वार पर ही कमा रही हैं।

वहीं राजन ने बताया कि इन प्रोडक्ट को बनाने के लिए वे हिमाचल व बाहरी राज्यों से रॉ-मैटेरियल खरीद रहे हैं। इन प्रोडक्ट की पैकिंग के लिए प्लास्टिक का कम से कम इस्तेमाल हो इसका भी खास ध्यान रखा जा रहा है। कैंडल की पैकिंग के लिए वेस्ट पाइन नीडल व कोकोनट सेल का इस्तेमाल किया जा रहा है।

Ekta TSN

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