चंडीगढ़-:मीडिया वेल बीइंग एसोसिएशन (एमडब्ल्यूबी) के उत्तर भारत अध्यक्ष चंद्र शेखर धरणी के नेतृत्व में संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव प्रवीण अत्रेय तथा एडीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) संजय कुमार से मुलाकात कर पलवल में पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले को प्रमुखता से उठाया।प्रतिनिधिमंडल ने जिला लोक संपर्क अधिकारी (डीआईपीआरओ) पर संगठन के पलवल जिलाध्यक्ष गुरुदत्त गर्ग सहित अन्य पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार करने, पत्रकारिता कार्य में बाधा पहुंचाने तथा वीडियो रिकॉर्डिंग से रोकने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल ने दोनों वरिष्ठ अधिकारियों को विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पत्रकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।यदि किसी सरकारी अधिकारी द्वारा पत्रकारों के साथ अनुचित व्यवहार किया जाता है या उनके कार्य में व्यवधान उत्पन्न किया जाता है तो इससे न केवल प्रेस की स्वतंत्रता प्रभावित होती है बल्कि शासन और मीडिया के बीच विश्वास का वातावरण भी कमजोर पड़ता है।संगठन ने आग्रह किया कि पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराई जाए ताकि सत्य सामने आ सके और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कदम उठाए जा सकें।मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव प्रवीण अत्रेय ने प्रतिनिधिमंडल की बात गंभीरता से सुनी और मौके पर ही संबंधित विभाग के अधिकारियों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार पत्रकारों के सम्मान,अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्वतंत्र मीडिया के सिद्धांतों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।उन्होंने आश्वस्त किया कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों का परीक्षण कराया जाएगा और जांच रिपोर्ट के आधार पर विभाग आवश्यक एवं उचित कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी शिकायत को गंभीरता से लेती है और पत्रकारों के सम्मान के साथ किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल ने इस दौरान बताया कि पलवल जिलाध्यक्ष गुरुदत्त गर्ग की ओर से पूरे घटनाक्रम की लिखित शिकायत पहले ही पुलिस अधीक्षक, पलवल को दी जा चुकी है। शिकायत पुलिस बुक संख्या 419 में प्राप्ति रसीद संख्या 75, दिनांक 2 जुलाई 2026 के तहत दर्ज है। संगठन ने अधिकारियों से अनुरोध किया कि शिकायत पर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित कर निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि संबंधित पक्षों को न्याय मिल सके।एडीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) संजय कुमार ने भी प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि पुलिस इस प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यात्मक जांच करेगी।उन्होंने कहा कि शिकायत के प्रत्येक बिंदु का गंभीरता से परीक्षण किया जाएगा तथा उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी मामले में कानून से ऊपर कोई नहीं है और यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
एमडब्ल्यूबी के कोषाध्यक्ष तरुण कपूर ने कहा कि संगठन पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार की कड़ी निंदा करता है। उनका कहना था कि यदि किसी पत्रकार को वीडियो रिकॉर्डिंग करने से रोका जाता है,कैमरे पर हाथ मारा जाता है या उसके साथ अपमानजनक व्यवहार किया जाता है तो यह केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरी पत्रकार बिरादरी के अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रश्न बन जाता है।उन्होंने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र की आधारशिला है और इसकी रक्षा करना सभी संस्थाओं की साझा जिम्मेदारी है।उन्होंने कहा कि जिला लोक संपर्क अधिकारी का प्रमुख दायित्व सरकार और मीडिया के बीच सकारात्मक संवाद स्थापित करना तथा पत्रकारों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना होता है।यदि इसी पद पर कार्यरत अधिकारी पर पत्रकारों के साथ असहयोग या अभद्र व्यवहार के आरोप लगते हैं तो इससे सरकारी व्यवस्था की छवि भी प्रभावित होती है।इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाना अत्यंत आवश्यक है।
संगठन ने मांग दोहराई कि यदि जांच में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई के साथ विभागीय कार्रवाई भी की जाए। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि ऐसी घटनाओं पर समय रहते प्रभावी कदम उठाना आवश्यक है ताकि भविष्य में किसी भी पत्रकार को अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन करते समय इस प्रकार की परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।तरुण कपूर ने कहा कि सरकार और मीडिया के बीच विश्वास, संवाद और सहयोग का वातावरण लोकतंत्र की मजबूती के लिए बेहद आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पत्रकारों की शिकायतों का न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित करेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी दिशा-निर्देश भी जारी करेगी।
एमडब्ल्यूबी के उत्तर भारत अध्यक्ष चंद्र शेखर धरणी ने कहा कि यदि आवश्यकता महसूस हुई तो संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही पलवल का दौरा करेगा। उन्होंने बताया कि संगठन अपनी जिला इकाई के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है और पत्रकारों के सम्मान, सुरक्षा तथा अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं वैधानिक तरीके से हर संभव प्रयास करता रहेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री, डीजीआईपीआर तथा पुलिस प्रशासन के संज्ञान में मामला आने के बाद निष्पक्ष जांच होगी और उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। संगठन ने दोहराया कि पत्रकारों के सम्मान और स्वतंत्र कार्य वातावरण की रक्षा के लिए उसका संघर्ष आगे भी निरंतर जारी रहेगा।
