पंजाब | राज्य के किसानों के लिए एक गंभीर चेतावनी भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से कीटनाशकों और रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण पंजाब की मिट्टी अपनी उपजाऊ शक्ति खोती जा रही है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, राज्य की मिट्टी अब “वेंटिलेटर” पर पहुंच चुकी है। इसका मतलब है कि बिना भारी मात्रा में रसायनों के प्रयोग के अब उपज लेना लगभग असंभव हो गया है। मिट्टी की जैविक गुणवत्ता में भारी गिरावट आई है और इसका असर सीधे तौर पर फसलों की पैदावार पर पड़ा है। साथ ही भूजल संकट भी मिट्टी की नमी को प्रभावित कर रहा है, जिससे खेतों में उत्पादन घट रहा है।
केंद्र सरकार ने दिए जांच के आदेश
मौजूदा हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने पंजाब के सभी जिलों के कृषि अधिकारियों को 10 से 15 हजार मिट्टी के नमूने इकट्ठा करने का टारगेट दिया है। इन नमूनों के आधार पर मिट्टी की स्थिति का मूल्यांकन किया जाएगा और इसके अनुसार किसानों को रसायनों की सही मात्रा और उपयोग के बारे में जागरूक किया जाएगा।
लगातार घट रही उपज
खन्ना के गांव रौणी निवासी युवा किसान अवतार सिंह ग्रेवाल ने बताया कि दो दशक पहले पंजाब की मिट्टी में जैविक गतिविधियां और मित्र कीटों की भरपूर उपस्थिति हुआ करती थी। लेकिन रासायनिक खेती ने इसे नष्ट कर दिया। उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में गेहूं और धान दोनों की पैदावार में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2014-15 के समय पंजाब में गेहूं की प्रति एकड़ औसत पैदावार 25-28 क्विंटल थी, जबकि धान की 30-40 क्विंटल। अब यह घटकर गेहूं में 22 क्विंटल और धान में 28 क्विंटल प्रति एकड़ रह गई है।
