बिलासपुर,सुभाष ठाकुर ( TSN)- नवरात्रि के अवसर पर शक्तिपीठ श्री नैना देवी के दरबार में सुबह से श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंच रहे है.माता नाना देवी की विधिविधान से पूजा की गई. नवरात्री के लिए मन्दिर को भव्य रूप से सजाया गया है. इसके अलावा मन्दिर में श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था भी की गई है.
बता दें कि शक्तिपीठ श्री नैना देवी में पंजाब, हिमाचल, हरियाणा दिल्ली, यूपी, बिहार और अन्य प्रदेशों से काफी संख्या में श्रद्धालु नवरात्र पूजन के लिए पहुंचना शुरू हो गए हैं.यह अगले 10 दिन तक सिलसिला चलता रहेगा.हिमाचल प्रदेश सरकार के दिशा निर्देशों से और मंदिर न्यास के द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पुख्ता बंदोबस्त किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े.
यहां गिरे थे माता सती के नेत्र
कहा जाता है कि जब दक्ष प्रजापति ने यज्ञ का आयोजन किया तो उसमें माता सती और भगवान शिव शंकर जी को यज्ञ में नहीं बुलया.माता सती हठ करके अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ में चली गई, लेकिन वहां पर भगवान भोले शंकर जी का अपमान देखकर क्रोधित होकर यज्ञशाला में माता कूद गई और माता सती के अर्धजले शरीर को भगवान शंकर ने अपने त्रिशूल पर उठाकर ब्रह्मांड का भ्रमण
शुरू किया,फिर भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र के द्वारा माता सती के अंगों को काट डाला और जहां-जहां भी माता सती के अंग गिरे वहां वहां पर शक्तिपीठों की स्थापना हुई है.माता श्री नैनादेवी जी के दरबार में माता सती के नेत्र गिरे इसलिए इस शक्तिपीठ का नाम श्री नैना देवी पड़ा
ये भी है मान्यता
एक अन्य मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि माता श्री नैना देवी महिषासुर राक्षस का वध किया है और देवताओं ने उसमें खुश होकर जय नयने उद्घोष किया,जिससे इस शक्ति पीठ का नाम श्री नैना देवी पड़ा और जो भी श्रद्धालु माता के दरबार में आते हैं माता रानी उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं.
