Mandi, 8 July-भूस्खलन और बाढ़ से तबाह हुई सराज घाटी में मानो समय थम गया हो। सड़कें कट गईं, गांवों का संपर्क टूट गया, और लोग संकट में घिर गए। ऐसे कठिन समय में राहत और बचाव कार्यों में जुटे जवान स्थानीय लोगों के लिए किसी फ़रिश्ते से कम नहीं हैं।
दुर्गम पहाड़ियों और टूटी पगडंडियों से होते हुए जवान भारी सामान पीठ पर लादे राहत सामग्री लेकर गांव-गांव पहुंच रहे हैं। ये केवल राशन या दवाइयाँ नहीं ला रहे — ये जीवन की डोर थामे, उम्मीद लेकर आ रहे हैं। जहां ज़रूरत है, वहीं अस्थायी मेडिकल कैंप बनाकर प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया जा रहा है।
250 से अधिक जवान दिन-रात कर रहे सेवा
मंडी के उपायुक्त अपूर्व देवगन ने जानकारी दी कि सराज क्षेत्र में इस समय 250 से अधिक जवान राहत कार्यों में जुटे हुए हैं। इसमें सेना, वायुसेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, होम गार्ड्स, राज्य पुलिस और निरंकारी मिशन जैसी स्वयंसेवी संस्थाएं भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
हर गाँव,हर व्यक्ति तक मदद का संकल्प
कुल्लू से आई आईटीबीपी की 46 सदस्यीय टीम के साथ आए असिस्टेंट कमांडर एवं मेडिकल ऑफिसर डॉ. रवनीश पराशर ने बताया कि उनका मिशन है कि “कोई भी व्यक्ति मदद से वंचित न रहे।”उनकी टीम हर राहत अभियान में दवाइयों,खाद्य सामग्री और मेडिकल किट्स के साथ रवाना होती है।जहाँ ज़रूरत पड़ी, वहीं स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और गंभीर रूप से बीमार लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया गया।
डॉ. पराशर ने भावुक होकर कहा,जब लोग संकट में होते हैं, तब उनकी मदद करना हमारे लिए सिर्फ एक ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि गर्व की बात होती है। हमारी कोशिश है कि राहत हर दरवाज़े तक पहुंचे और कोई भी अकेला न महसूस करे।”
