मोनिका रावत, चंडीगढ़ -:सूचना का अधिकार कानून के तहत जानकारी उपलब्ध न कराने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। अब ऐसे मामलों में लगाए गए जुर्माने की राशि संबंधित अधिकारियों के वेतन और सेवानिवृत्त कर्मियों की पेंशन से हर महीने निर्धारित किस्तों में वसूली जाएगी। लंबे समय से लंबित दंड की वसूली सुनिश्चित करने के लिए यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन अधिकारियों या कर्मचारियों पर राज्य सूचना आयोग द्वारा दंड लगाया गया है और जिन्होंने अब तक राशि जमा नहीं कराई है, उनके खिलाफ नियमित कटौती की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। प्रथम श्रेणी के अधिकारियों के वेतन से 10,000 रुपये प्रतिमाह, द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों से 7,000 रुपये और तृतीय श्रेणी कर्मचारियों से 4,000 रुपये प्रति माह की दर से राशि काटी जाएगी। सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों के मामले में उनकी पेंशन से क्रमशः 5,000 रुपये, 3,500 रुपये और 2,000 रुपये प्रतिमाह की कटौती की जाएगी।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्डों और निगमों के प्रमुखों, मंडल आयुक्तों तथा उपायुक्तों को निर्देश जारी कर दंड की समयबद्ध वसूली सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित विभागों के आहरण एवं वितरण अधिकारी (डीडीओ) वेतन या पेंशन से मासिक कटौती करेंगे और इसकी निगरानी विभागाध्यक्ष स्वयं करेंगे।सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20(1) के तहत यदि कोई राज्य जन सूचना अधिकारी निर्धारित समयसीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराता है, तो उस पर प्रति दिन 250 रुपये की दर से अधिकतम 25,000 रुपये तक का दंड लगाया जा सकता है। विभिन्न विभागों से जुड़े कई मामलों में दंड की बड़ी राशि अब तक लंबित है। बताया जा रहा है कि कुल लंबित राशि करोड़ों रुपये में पहुंच चुकी है, जिसे वसूलने के लिए यह नई व्यवस्था लागू की गई है।
सरकार ने यह भी राहत दी है कि एकमुश्त बड़ी रकम वसूलने के बजाय मासिक किस्तों में कटौती की जाएगी, ताकि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर अचानक आर्थिक बोझ न पड़े। यह कटौती तब तक जारी रहेगी जब तक पूरी बकाया राशि वसूल नहीं हो जाती।निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी दंडित अधिकारी का निधन हो चुका है, तो उसके खिलाफ लगाया गया दंड माफ माना जाएगा और परिवार से किसी प्रकार की वसूली नहीं की जाएगी। सभी विभागों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि वसूली की प्रगति रिपोर्ट नियमित अंतराल पर राज्य सूचना आयोग को भेजी जाए।
सरपंचों के मानदेय से भी होगी कटौती
ग्राम पंचायतों से जुड़े मामलों में भी सख्त कदम उठाए गए हैं। कार्यरत सरपंचों पर लगाए गए दंड की राशि उनके मानदेय से 3,000 रुपये प्रतिमाह की दर से वसूल की जाएगी। यदि कोई पूर्व सरपंच स्वेच्छा से दंड राशि जमा नहीं करता है, तो संबंधित मामला जिला प्रशासन को भेजा जाएगा, जहां लागू राजस्व कानूनों या वैकल्पिक विवाद निवारण तंत्र के माध्यम से वसूली की कार्रवाई की जाएगी।सरकार का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य पारदर्शिता को मजबूत करना और सूचना के अधिकार कानून को प्रभावी ढंग से लागू करना है। अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि सूचना उपलब्ध कराने में लापरवाही अब आर्थिक दंड के रूप में सीधे उनकी आय पर असर डालेगी।
