शिमला,संजू-हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ (HGTU) ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का स्वागत करते हुए इसे कर्मचारियों के हित में ऐतिहासिक निर्णय बताया है। संघ ने इसके साथ ही प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार,स्कूलों के पुनर्गठन,शिक्षकों की पदोन्नति,आवश्यकता-आधारित स्थानांतरण,नई भर्तियों और लंबित महंगाई भत्ते (डीए) की मांगों को भी प्रमुखता से उठाया।शनिवार को शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता में HGTU के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि संघ शिक्षा और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर लगातार रचनात्मक सुझाव देता रहा है और भविष्य में भी सरकार के साथ सकारात्मक संवाद जारी रखेगा।
वीरेंद्र चौहान ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा कर्मचारी सेवा शर्त अधिनियम-2024 को निरस्त किए जाने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है।उन्होंने कहा कि यह अधिनियम कर्मचारियों के सेवा अधिकारों और वरिष्ठता को प्रभावित करता था,जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने असंवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया।अब कर्मचारियों को पहली नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता और वित्तीय लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है।उन्होंने प्रदेश में लगातार घट रही छात्र संख्या और बंद होते स्कूलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इसका असर शिक्षकों के पदों और भविष्य की भर्तियों पर पड़ेगा।उन्होंने कहा कि HGTU लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सुझाव देता रहा है। वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के समक्ष प्राथमिक स्तर से अंग्रेजी माध्यम और प्री-प्राइमरी शिक्षा शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे बाद में सरकार ने लागू किया। इसके अतिरिक्त वर्ष 2017 में ज्वालाजी कार्यशाला की रिपोर्ट भी सरकार को सौंपी गई थी।उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के प्रयासों से शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल की रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और शिक्षा सचिव राकेश कंवर द्वारा किए गए प्रयासों के चलते प्रदेश गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मामले में देश में 21वें स्थान से पांचवें स्थान तक पहुंचा है। हालांकि उन्होंने कहा कि घटते नामांकन की चुनौती अब भी गंभीर बनी हुई है। इससे निपटने के लिए पहली से बारहवीं तक के सभी स्कूलों का चरणबद्ध पूर्ण विलय कर एकीकृत शिक्षा प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है।
शिक्षकों की कार्य व्यवस्था और स्थानांतरण नीति पर बोलते हुए चौहान ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों का हित सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने प्राथमिक कक्षाओं में सेवाएं दे रहे वरिष्ठ शिक्षकों के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि क्लस्टर सिस्टम और डेपुटेशन को विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डेपुटेशन स्थायी समाधान नहीं है। विभाग में खाली पड़े पदों को शीघ्र भरने के लिए नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए ताकि स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर हो सके।उन्होंने शिक्षकों के स्थानांतरण पर लंबे समय से लागू प्रतिबंध हटाने की मांग करते हुए कहा कि पारिवारिक और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए वर्ष में कम से कम दो बार आवश्यकता-आधारित ट्रांसफर विंडो खोली जानी चाहिए। इसके अधिकार संबंधित विभागों को दिए जाएं ताकि समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से तबादले हो सकें।
संघ अध्यक्ष ने विभिन्न संवर्गों की लंबित पदोन्नतियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने टीजीटी से हेडमास्टर, जेबीटी, सीएंडवी तथा प्रिंसिपल स्तर की पदोन्नतियों को शीघ्र पूरा करने की मांग की। उन्होंने धरने पर बैठे जेबीटी शिक्षकों की पदोन्नति की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि लंबे समय से लंबित मामलों का शीघ्र समाधान किया जाना चाहिए।इसके अलावा उन्होंने जेबीटी और सीएंडवी शिक्षकों के लिए पांच प्रतिशत अंतर-जिला स्थानांतरण कोटा बहाल करने, टीजीटी हिंदी और टीजीटी संस्कृत शिक्षकों को पदनाम के अनुरूप वेतनमान देने तथा सीएंडवी शिक्षकों को 20 वर्ष की सेवा के बाद मिलने वाली दो विशेष वेतन वृद्धियों को पुनः लागू करने की मांग की। उन्होंने डिप्टी डायरेक्टर पद को प्रोमोशनल पोस्ट बनाने के निर्णय का स्वागत करते हुए क्लस्टर प्रणाली के अंतर्गत प्रत्येक जिले में संयुक्त निदेशक का पद सृजित करने का सुझाव भी दिया।
पत्रकार वार्ता के अंत में वीरेंद्र चौहान ने कहा कि सीबीएसई से संबद्ध सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री से आगामी 15 अगस्त के अवसर पर कर्मचारियों के लिए कम से कम पांच प्रतिशत महंगाई भत्ते की घोषणा करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और वे अधिक उत्साह के साथ अपनी सेवाएं दे सकेंगे।
