मंडी : धर्मवीर ( TSN)-हिमाचल प्रदेश में परिवहन विभागों के हजारों सेवानिवृत कर्मचारी अपनी पेंशन और अन्य भत्तों का भुगतान सरकार द्वारा न किए जाने से आज सड़कों पर निकलने को मजबूर हो गए हैं। पूरा जीवन जन सेवा में लगाकर आज परिवहन कर्मी अपनी अंतिम और छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी मोहताज हो गया है। अपनी समस्याओं के निदान के लिए परिवहन सेवानिवृत कर्मचारी बीते कई वर्षों से अपने हकों को मांग रहे हैं लेकिन सरकार है कि कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। अपनी समस्याओं के निदान के लिए मंडी में मंगलवार को हिमाचल प्रदेश परिवहन विभाग से सेवानिवृत कर्मचारियों ने हिमाचल प्रदेश परिवहन सेवानिवृत कर्मचारी कल्याण मंच के बैनर तले बस अड्डा मंडी से डीसी ऑफिस तक रोष रैली निकाली और जिला प्रशासन मंडी के माध्यम से प्रदेश सरकार को एक मांग पत्र भी भेजा।
परिवहन पेंशनरों को छोड़ अन्य विभागों के कर्मचारियों को मिले लाभ
इस मौके पर कर्मचारी कल्याण मंच के प्रदेश अध्यक्ष व कार्यकारी अध्यक्ष ने सरकार को अब अंतिम चेतावनी दे डाली है कि यदि अब भी उनकी मांगों को पूरा नहीं करती है तो फिर आने वाले समय में बड़ा आंदोलन किया जाएगा जिसकी जिम्मेदार प्रदेश की सरकार होगी। मंच के अनुसार हिमाचल प्रदेश सरकार के सीएम परिवहन कर्मचारी कल्याण मच की बात सुनने तक को तैयार नहीं हैं। मंच के अनुसार वह केवल सरकार से पेंशन रूल लागू करने का आग्रह ही कर रहे। अन्य विभागों में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को डीए की किस्त दे दी गई है लेकिन जो व्यक्ति अपने अंतिम समय में बैठा है उसे उनके हकों से ही सरकार वंचित रख रही है। बलराम पूरी ने कहा कि खुद सीएम और उनका पूरा परिवार आज पेंशन का हकदार हो गया है, एक ही घर में तीन लोगों को पेंशन मिलेगी लेकिन सीएम हिमाचल प्रदेश परिवहन विभाग से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को उनके हकों से महरूम कर रही है। बलराम पूरी ने बताया कि आज तक प्रदेश सरकार ने कोर्ट में केस लड़ने के लिए जितने रूपए खर्च किए उनमें से सरकार आज तक एक भी केस नहीं जीत पाई है और केवल वकीलों की ही मौज हो रही है। कार्यकारी अध्यक्ष ब्रिज लाम ने बताया कि जनवरी 2016 से पे स्केल का एरियर, 65, 70 व 75 वर्ष पूरा कर चुके सेवानिवृत कर्मियों को 5, 10, 15 प्रतिशत अलांउस का भुगतान, मेडिकल बिल, ग्रेच्युटि, लीव इनक ैशमेंट का भुगतान सरकार नही ंकर रही है और साथ ही माननीय उच्च व सर्वोच्च न्यायालय को फैसलों को लागू न कर न्यायालय का अपमान भी कर रही है जो कि सही नहीं है।
