Panchkula,8 December-:पंचकूला में आयोजित भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (IISF) के तीसरे दिन ‘नए युग की प्रौद्योगिकियाँ—विजन 2047’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा को संबोधित करते हुए केंद्रीय ऊर्जा,आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि भारत तेज़ी से 6G, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और नवाचार आधारित भविष्य की ओर बढ़ रहा है।उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय और विद्यार्थियों से समाजहित में नई तकनीकों के तेज़ विकास और प्रभावी उपयोग का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि हरियाणा के पंचकूला में IISF का आयोजन राज्य के लिए गौरव की बात है। इससे पहले भी हरियाणा को फरीदाबाद में इस महोत्सव की मेजबानी करने का अवसर मिल चुका है। इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य अकादमिक जगत और उद्योग जगत को एक मंच पर लाकर अनुसंधान और नवाचार को गति देना है।मंत्री ने कहा कि विज्ञान ने पिछले वर्षों में अभूतपूर्व प्रगति की है। दूरसंचार क्रांति ने दुनिया को ‘ग्लोबल विलेज’ में बदल दिया है और अब एआई तकनीक भविष्य के लिए गेम-चेंजर साबित हो रही है।उन्होंने कहा कि यदि एआई का उपयोग जिम्मेदारी और सतर्कता के साथ किया जाए, तो किसी भी जटिल चुनौती का समाधान आसानी से संभव हो सकता है।
ऊर्जा क्षेत्र में एआई की भूमिका पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटरिंग और आवश्यकता आधारित ऊर्जा प्रबंधन से बिजली की खपत में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।आवासन क्षेत्र में एआई आधारित डिजाइनिंग का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि एआई के माध्यम से ऐसे घरों की डिजाइन तैयार की जा सकती है जो गर्मी–सर्दी के प्रभाव को प्राकृतिक रूप से संतुलित कर सकें।उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपये का अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) कोष स्थापित किया है, जिसका उद्देश्य निजी क्षेत्र के आरएंडडी को बढ़ावा देना और एआई, क्वांटम, स्वच्छ ऊर्जा व बायोटेक जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में उच्च स्तरीय अनुसंधान को प्रोत्साहित करना है। यह कोष राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (NRF) के तहत संचालित होगा।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हरियाणा विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और राज्य के उच्च शैक्षणिक संस्थानों में नवाचार को विशेष बढ़ावा दिया जा रहा है। कार्यक्रम से पूर्व उन्होंने विज्ञान प्रदर्शनी का भी निरीक्षण किया।इस अवसर पर अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी. नारायण, IITM निदेशक डॉ. सूर्यचंद्र राव, तथा CSIR-CSIO के निदेशक डॉ. शांतनु भट्टाचार्य समेत कई प्रमुख वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ मौजूद रहे।
