दिल्ली (एकता): अगर आप मसालेदार भोजन के शैकीन हैं, तो मिर्च का स्वाद आपके लिए बहुत मायने रखता है। दरअसल कई लोगों को तीखा खाने की क्रेविंग होती है तो किसी को स्पाइसी फूड पसंद होता है। हम स्वाद के लिए खाने में लाल और हरी दोनों मिर्च का इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि इसका तीखापन खाने को स्वादिष्ट बनाता है। मिर्च लाल हो या हरी ज्यादातर सभी तरह की मिर्च का स्वाद तीखा ही होता है, लेकिन कभी आपने सोचा है कि लाल-हरी मिर्ची इतनी तीखी क्यों होती है। आपने कभी जानने की कोशिश नहीं की। आज हम आपको बताएंगे कि आखिर मिर्च इतनी तीखी होती क्यों है:-

आखिर मिर्च क्यों होती है तीखी
आज हम आपको मिर्च के तीखा होने का राज बताने जा रहे हैं। मिर्च में कैप्साइसिन नामक कंपाउंड होता है, जो इसके तीखेपन का कारण है। यह मिर्च के बीच वाले हिस्से में मौजूद होता है। यह इसे फफूंद से भी बचाता है। मिर्च का तीखापन सिर्फ जीभ और त्वचा पर पाई जाने वाली नसों पर अपना असर छोड़ता है। खून में सब्सटेंस पी नामक केमिकल रिलीज करता है, जो दिमाग में गर्मी का सिग्नल देता है।

पानी से नहीं होता तीखापन कम
अगर आप मिर्च के ऊपर से पानी पीते हैं तो आपका तीखापन कम नहीं होता, बल्कि आपको महसूस होता है। इसकी वजह है कि कैप्साइसिन पानी में घुलनशील नहीं होता है। अगर आपको जलन शांत करनी है तो इसके लिए दूध, दही, शहद या शक्कर का इस्तेमाल करना चाहिए। जिससे आपको मिर्च का तीखापन कम लगेगा।
इन लोगों को नहीं करना चाहिए खाने में मिर्च का प्रयोग
जो मरीज होते हैं उन्हें ज्यादा मिर्च का प्रयोग नहीं करना चाहिए। स्पेशल अस्थमा के मरीजों को ध्यान देना चाहिए। इससे अटैक आ सकता है।
अल्सर के मरीजों को भी लाल मिर्च का सेवन कम करना चाहिए। इससे आपकी समस्या ज्यादा बढ़ सकती है।
बवासीर के मरीजों को भी ज्यादा मिर्च खाने से समस्या बढ़ जाती है।
हरी मिर्च का ज्यादा सेवन त्वचा संबंधित परेशानियां भी पैदा करता है।
मिर्च में तीखापन क्यों होता है?
मिर्च में कैप्साइसिन नाम का एक कंपाउंड होता है, जिससे आंख या मुंह पर लगने से तेज जलन होने लगती है। ये मिर्च के हर बीज में होती है।
