अंबाला-:देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं, बढ़ती बेरोज़गारी तथा जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में रविवार को अंबाला छावनी में ‘युवा एकजुटता मार्च’ निकाला गया। सामाजिक और सर्वदलीय स्वरूप में आयोजित इस मार्च में छात्र-छात्राओं, महिलाओं, युवाओं, किसानों, कर्मचारियों, व्यापारियों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए।
रेलवे रोड पार्किंग से शुरू हुआ मार्च सदर बाजार से होते हुए पुरानी अनाज मंडी पहुंचा। प्रतिभागियों ने हाथों में तिरंगा और मोमबत्तियां लेकर देशभक्ति के गीतों के साथ युवाओं के भविष्य, निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था और लोकतांत्रिक अधिकारों के समर्थन में अपनी एकजुटता व्यक्त की। समापन पर ‘रघुपति राघव राजा राम’ भजन के साथ सामूहिक प्रार्थना और राष्ट्रगान किया गया।
मार्च का नेतृत्व कर रहीं चित्रा सरवारा ने कहा कि यह किसी राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के युवाओं के प्रति समाज के समर्थन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं पर उठे सवालों ने लाखों युवाओं का विश्वास प्रभावित किया है। उनका कहना था कि सरकार का दायित्व पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था सुनिश्चित कर युवाओं का भरोसा बहाल करना है।उन्होंने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतंत्र में असहमति का समाधान संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए। युवाओं की आवाज़ को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।चित्रा सरवारा ने कहा कि किसान आंदोलन, महिला खिलाड़ियों और अन्य जन आंदोलनों की तरह युवाओं की मांगों को भी गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उनके अनुसार यह संघर्ष किसी दल विशेष का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य और अवसरों की सुरक्षा का प्रश्न है।उन्होंने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। साथ ही कहा कि सफलता का आधार केवल मेहनत और योग्यता हो, ऐसी व्यवस्था विकसित करना समय की आवश्यकता है।कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने शिक्षा, रोजगार, निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण जनजागरण अभियान जारी रखने का संकल्प लिया। मार्च में अंबाला छावनी के अनेक धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों, पार्षदों, पूर्व पार्षदों, पंचों और सरपंचों ने भी भागीदारी की।
