धर्मशाला : राहुल चावला ( TSN)-जिला मुख्यालय धर्मशाला स्थित राज्य युद्ध स्मारक में शुक्रवार को कारगिल विजय दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान ब्रिगेडियर जीएस पूरी, स्टेशन कमांडर योल नौंवी कोर ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत करते हुए शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। जिला प्रशासन, सेना के अधिकारियों, पूर्व सैनिकों व विभिन्न संस्थाओं ने भी पुष्प अर्पित किये। ब्रिगेडियर जीएस पूरी, स्टेशन कमांडर योल नौंवी कोर ने बताया कि जवानों के शौर्य को याद करते हुए विजय दिवस पर शहादत पाने वाले शहीदों को श्रद्धाजंलि अर्पित की गई, युवाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।
देश के कुल चार परमवीर चक्र में दो हिमाचल के नाम
25 मई 1999 को शुरू हुए कारगिल युद्ध में हिमाचल के 52 जवानों ने बलिदान दिया था। देश भर में कुल 527 योद्धा शहीद हुए, जिसमें 52 वीरभूमि हिमाचल के थे। कारगिल विजय पर देश भर में सेना के सर्वोच्च सम्मान में कुल चार परमवीर चक्र घोषित किए गए, जिसमें दो हिमाचल के वीरों के नाम हैं। इसमें कैप्टन विक्रम बत्तरा मरणोपंरात और सुबेदार संजय कुमार जीवित को परमवीर चक्र से नवाजा गया। कारगिल युद्ध में कांगड़ा जिले के सबसे अधिक 15 जवान शहीद हुए थे। मंडी जिले से 11, हमीरपुर के 7, बिलासपुर के 7, शिमला से 4, ऊना से 2, सोलन और सिरमौर से 2-2 जबकि चंबा और कुल्लू जिले से 1-1 जवान शहीद हुआ था।
26 जुलाई 1999 को आखिरी चोटी पर फहराया था तिरंगा
सेवानिवृत कर्नल करतार सिंह ने कहा कि उन्हें 1999 का करगिल युद्ध आज भी याद है जब देश के जवानों ने अपने प्राणों की आहूतियां देकर टाइगर हिल पर तिरंगा फहराया था। हमारी सेनाओं ने अपनी पूरी बहादुरी से मातृभूमि में घुसे आक्रमणकारियों को मार भगाया और 26 जुलाई को आखिरी चोटी पर भी विजय पा ली थी। कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने आपरेशन विजय शुरू किया, जिसमें 30 हजार भारतीय सैनिक शामिल हुए थे। थल सेना की सपोर्ट में भारतीय वायु सेना ने 26 मई 1999 को आपरेशन सफेद सागर शुरू किया, जबकि जल सेना ने कराची से पहुंचने वाले समुद्री मार्ग से पूर्ण सप्लाई रोकने के लिए अपने जहाजी बेड़े को अरब सागर में तैनात किया। कारगिल युद्ध दो महीने से ज्यादा चला था।
